24hnbc सुनियोजित तरीके से लूट, मिडिल क्लास को
Saturday, 15 Aug 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 16 अगस्त 2026।
भारत की मध्यम वर्ग के बचत पर 2014 के पूर्व हमें गर्व हुआ करता था और इसी बचत ने हमको आर्थिक मंदी से बाहर निकाला था पर प्रधान सेवक की सरकार की नजर मध्यम वर्ग के बचत पर कुदृष्टि के साथ लग गई और मीडिया के सहयोग से उसे पर ऐसा डाका डाला गया कि देश के कुछ खास उद्योगपतियों के अंपायर खड़े हो गए और अब ये प्लान मध्यम वर्ग का ढोल फोड़ दे रहा है। वेल्थ और पीडीपी अलग-अलग है पर ढोल अच्छा दिखाई दे इसके चलते जीडीपी को बताया जाता है और वेल्थ को गायब कर दिया जाता है। हमारी सेविंग की ग्रोथ खत्म है और मिडिल क्लास का पैसा म्युचुअल फंड के नाम पर इक्विटी में लग गया। एक समय था जब शेयर मार्केट में मिडिल क्लास का आदमी पैसा नहीं लगता था तो म्युचुअल फंड के कॉन्सेप्ट आए और 2014 के बाद से क्रिकेटर, बॉलीवुड के कलाकार और सोनाम धन्य आर्थिक विशेषज्ञों ने म्युचुअल फंड सेफ है लॉन्ग टर्म में फायदा देता है जब आई पी करिए को कभी टेनिस के सहारे कभी आईपीएल के सहारे खूब पौंढौली दी। हालत यह हो गई की बैंक की एचडी घटने लगी और कुल बचत का 15% तक म्युचुअल फंड में लगने लगा जो कभी पहले दो से तीन परसेंट था। देश में 10 करोड़ अकाउंट डीमैट खुल गए। हर महीने करोड़ का एह आईं पी देश में लगने लगा। 2023 चुनाव की गणना के पूर्व देश के किस नेता ने कहा था शेयर में पैसा लगाइए जम के मुनाफा देगा और मार्केट क्रश कर गया ऐसा नीचे गया कि निवेशकों का लाखों करोड़ रुपए कुछ घंटे में चट कर गया। ध्यान रखें 2014 के बाद देश के गुजरात विशेष से आने वाले कुछ उद्योगपतियों ने अधोसंरचनात्मक निवेश में खूब काम किया यह पैसा उन्होंने बैंकों से कर्ज लिया था और फंड मैनेजर के साथ हाथ मिलाकर म्युचुअल फंड एस आई पी मतलब मध्यम वर्ग जो पैसा मार्केट में लगता था उससे अपने कर्ज पता दिए। 2024 से 26 के बीच एस आई पी में काम करने वाली नेगेटिव रिटर्न वाली कंपनियों की संख्या 243 से बढ़कर 733 हो गई और उन उद्योगपति का चेहरा लाल हो गया हमारा खून चूस कर। उनका पेट इतने पर नहीं भरा है दूसरा दांव उस युवा पर लगाया जो एस आई पी नहीं करता शेयर मार्केट में नहीं आता पर हाथ में मोबाइल रखता है। गेमिंग जोन और आईपीएल की फ्रेंटेसी मात्र 49 रुपए की लत क्या आप सोच सकते हैं की 20 करोड़ युवा इस झांसे में फंसे और उनका आर्थिक जनसंहार हो गया सरकार से इनका गठजोड़ था 28 प्रतिशत जीएसटी सरकार के पास 15% कमीशन दलालों के पास और बाकी पूरा पैसा क्रिकेट खिलौने वाली कंपनियों के पास। इस आर्थिक जनसंहार का परिणाम देश का एफएमसीजी सेक्टर ठप हो गया है महंगाई की मार₹5 और ₹10 के पैकटो पर भी पढ़ रही है। एफएमसीजी का मार्केट ठंडा है और पूरे देश के शेयर मार्केट में केवल सट्टेबाजी चल रही है।