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24hnbc अरुण पन्नालाल का मामला उतना आसान नहीं जितना दिखाया जा रहा है।
Saturday, 08 Aug 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 9 अगस्त 2026।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाने ने तेजी से कार्यवाही करते हुए ईसाई समाज के कैथोलिक के बीच लोकप्रिय व्हिसल ब्लोअर अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार कर लिया। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर सनातन धर्म के आराध्य शिव और अन्य देवी देवताओं को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी क्या उन्हें छत्तीसगढ़ का फादर स्टेन स्वामी बना देगी। यह पूरा मामला जितना सीधा दिखता है वैसा है नहीं। इसके पहले बिलासपुर के सिविल लाइन थाने ने ऐसे ही त्वरित कार्यवाही करते हुए भयादोहन के एक मामले में रायपुर जाकर ईसाई समाज प्रोटेस्टेंट के व्हिसल ब्लोअर यशराज सिंह को गिरफ्तार किया था। हम एक पुराना उदाहरण क्यों दे रहे हैं। अरुण पन्नालाल की आयु 79 साल है। उनकी शिक्षा के सैनिक स्कूल में हुई है वे इंजीनियर हैं और रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र भानपुरी में उनकी एक इंसुलेटर फैक्ट्री थी। जिसे अब उनके पुत्र संभालते हैं। उनकी बेटी चिकित्सा है और क्वालिफाइड चिकित्सक है। 
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ सालों से ईसाई समाज के प्रतिनिधि संस्थाओं के बीच विवाद बढ़ते जा रहे हैं। समाज के भीतर ही पारदर्शिता के मांग करने वालों को समाज से निकाल दिया जाता है। छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत के अवैतनिक पदाधिकारी के विरुद्ध विभिन्न थानों में एफआईआर दर्ज है पर कभी भी किसी भी मामले में पुलिस ने ऐसी त्वरित गिरफ्तारी डायोसिस के पदाधिकारियों के संदर्भ में नहीं की पर जब कभी भी ईसाई समाज के किसी व्हिसल ब्लोअर के खिलाफ मौका मिलता है तुरंत कार्यवाही हो जाती है। अरुण पन्नालाल के मामले में कुछ लोग उन्हें छत्तीसगढ़ के धर्मांतरण नेटवर्क का किंग पिन बताते हैं। यहां तक की भाजपा के विधायक अजय चंद्राकर सवाल उठाते हैं की फंडिंग कहां से आती है। पर जब व्हिसल ब्लोअर छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन पंजीकृत के स्कूलों में आर्थिक घोटाला और उसे पैसे से छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत की गतिविधियों का संचालन और पैसे के दुरुपयोग की बात उठाते हैं तो सरकार जांच भी नहीं करना चाहती। जहां कहीं जांच हुई जैसे बिलासपुर का बर्जेस स्कूल और सीए की ऑडिट रिपोर्ट में लाखों के घपले सामने आते हैं फर्जी पदाधिकारी बनकर लोक सेवकों के सामने झूठे कथन शिकायतें की जाती है एफआईआर के बाद पूरे साल भर के बावजूद चालान नहीं होता तो लगता है कि शासन प्रशासन दोहरा मापदंड रखते हैं। 
अभी कुछ दिन पूर्व कैथोलिक नर्स जो केरल से आई थी कि छत्तीसगढ़ में गिरफ्तारी हो गई और उन पर एक ऐसी धारा लगा दी गई जिसकी सुनवाई एन आई ए कोर्ट बिलासपुर में होनी थी तो कई सांसद गिरफ्तार नन के पक्ष में सक्रिय हुए यहां तक की रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता तक करवा दी गई। अरुण पन्ना लाल का मामला उनके कार्यक्षेत्र बस्तर, कांकेर से भी जुड़ा है। सरकार यहां पूंजी पत्तियों के लिए कॉलिंग बिछाती है पर प्रचार का काम करने वालों के लिए कांटे... संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार एंग्लो इंडियन समुदाय से एक प्रतिनिधित्व विधानसभा में होना चाहिए नहीं दिया जा रहा कांग्रेस शासन काल में तो एंग्लो इंडियन समुदाय से संसद में प्रतिनिधित्व था। आखिर पूरा का पूरा ईसाई समाज चाहे वह कैथोलिक हो या प्रोटेस्टेंट को ना तो छत्तीसगढ़ विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व मिला है ना ही लोकसभा में। ऐसे में जब साधारण ईसाई को मृत्यु पश्चात प्रभु वाटिका में जगह नहीं मिलती और उन्हें अपने इस नैसर्गिक अधिकार के लिए तहसीलदार से होते हुए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ता है तो सरकार विचार करें कि वह अपने ही नागरिकों के साथ ऐसा कैसे होने देती है। स्पष्ट है सरकार को ईसाई समाज की संस्थाओं में ऐसे पदाधिकारी अच्छे लगते हैं जो उसके एजेंडे को लागू करें। शेष की आवाज भी वह नहीं सुनना चाहती।