24hnbc परिसीमन लोकतंत्र के खिलाफ हो रहा षड्यंत्र
Tuesday, 04 Aug 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 5 अगस्त 2026।
परिसीमन पर अचानक चर्चा काम हो गई है जबकि इस पर गंभीर चर्चा सदन के बाहर भी होना चाहिए और देश के नागरिकों को यह पता होना चाहिए कि परिसीमन होगा तो उनके मत का वजन किस तरह काम होने वाला है।
सबसे पहले तो मोदी जी यह जवाब दें कि उन्होंने 1971 से लगातार हो रहे जनगणना को किसी षड्यंत्र के तहत टाला उनकी आदत है वे नहीं बताएंगे। जबकि भारत देश में जनगणना सिर्फ एक बार विश्व युद्ध के समय टाली गई थी। बाकी कभी नहीं 21 वाली जनगणना को इस तरह टाला जा रहा है कि इसके परिणाम 26 तक न आप आए। भारतीय संविधान व्यवस्था देता है कि सदन में अधिकतम सीट 550 होगी। यही वह नियम है जिसको बदलने के लिए संशोधन जरूरी है। 10 लाख की जनसंख्या पर एक सांसद चला आ रहा है। ऐसा नहीं है कि इसके पहले लोकसभा सीट की संख्या नहीं बढ़ी पर 1971 के बाद 75 के इमरजेंसी के समय जनसंख्या नीति जिसके लिए इंदिरा गांधी की आलोचना होती है असल में वह प्रोग्राम यू एन का था और उसे लागू करना जरूरी था।
दक्षिण के जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण पर बेहतर काम किया तो 76 में परिसीमन होना था पर इसे 25 साल के लिए टाला गया। 2001 में जब यह 25 साल समाप्त हो रहे थे और केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार थी तो उन्होंने तो उन्होंने फिर से 25 साल के लिए परिसीमन को टाला तो यह अवधि 26 में खत्म हो रही है। और 26 में परिसीमन होने पर 2031 वाली जनगणना से इसे लागू होना चाहिए। तो परिसीमन वाली लोकसभा 2034 में बनेगी पर इसे खींचकर 2029 में लाया जा रहा है। आखिर यह षड्यंत्र क्यों.... लगातार ईव्हीएम से हो रहे चुनाव ने सत्ताधारी दल को एक्यूरेट डाटा दे दिए हैं कि उनकी पार्टी को किस बूथ पर कितना वोट मिलता है। तो ऐसे में अपने और अपने सहयोगियों को इस तरह फिट किया जाएगा की लोकतांत्रिक तरीके से उनकी हर संभव ही ना हो। इसलिए 490 वाली लोकसभा को 888 वाली नहीं बनने देना है। परिसीमन के पहले कम से कम दो चुनाव बैलट से होना बेहद जरूरी है। अन्यथा भारत का लोकतंत्र पूरी तरह जैरी मेंडिंग हो जाएगा और इसमें फेयर इलेक्शन नहीं होगा। (परिसीमन की आड़ में जो षड्यंत्र किया जा रहा है इसका खुलासा हम समय-समय पर करते रहेंगे।