24 HNBC News
24hnbc जेकमेन का भूत फिर निकला, पेशी इस बार जिला न्यायालय में आज
Tuesday, 04 Aug 2026 18:00 pm
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
बिलासपुर, 5 अगस्त 2026। 
27.7.2026 बिलासपुर के स्थानीय दैनिक अखबार में आईसीडीसी इंडियन चर्च कौंसिल ऑफ़ डिसाईपल्ल ऑफ़ क्राइस्ट के सचिव अनुराग नथानियल ने एक आम सूचना प्रकाशित की है। इस आम सूचना प्रशासन से नजूल सीट नंबर 14 प्लॉट नंबर 20 जेकमेन मेमोरियल अस्पताल और ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल और यूनिटी हॉस्पिटल वाली जमीनों का जीन फिर से बाहर आ गया। सूचना बताती है कि आईसीडीसी के पक्ष में 4 मई 1989 में उच्च न्यायालय मध्य प्रदेश ने 86/1980 पादरी ई भागीरथी विरुद्ध बनवारी लाल में निर्णय दिया और डिकरी प्रदान की जिसका निष्पादन प्रकरण 18 अ 15 जिला न्यायालय में प्रस्तुत हुआ और उसमें छल पूर्वक अनाधिकृत व्यक्तियों ने आपस में समझौता कर लिया। विधि विरुद्ध इस समझौते को सक्षम न्यायालय में चुनौती दी गई और वहां से आईसीडीसी के पक्ष में आदेश हुआ और इसी आदेश के आधार पर जिला न्यायालय में फिर से वाद प्रस्तुत हुआ है। और इसकी सुनवाई आज 5 अगस्त को है। 
लगभग 10000 करोड़ की यह बसें कीमती जमीन इस समय जहां एक और राज्य सरकार की प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है वही बिलासपुर के प्रसिद्ध परिवार राय साहब बनवारी लाल के वंशजों लिए भी परेशानी का कारण है। जेकमेन मेमोरियल अस्पताल की लीज जिला प्रशासन ने खारिज तो कर दी पर नजूल न्यायालय के आदेश के विरुद्ध जितनी भी अपील और रिवीजन हुई उनमें आवेदक जो भी रहे हो वे कोर्ट में एक ही बिंदु पर हर की उनका लोकेश नहीं बनता। ऐसे में जब भी भूमि का असली स्वामी प्रकरण प्रस्तुत करेगा तो उसे पर न्यायालय को विचार करना पड़ेगा। इस पूरे कानूनी मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उसे समय के सीपीएन बरार में जिसे वर्तमान में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के रूप में जाना जाता है जितनी भी भूमि ईसाइयों ने खरीदी वह लगानी थी और उन्होंने उसे समय के नियम के मुताबिक इन जमीनों का पंजीयन रजिस्ट्री कराई थी तो ये जमीने विभिन्न जिला प्रशासनों ने नजूल की कैसे घोषित कर दी यह प्रश्न विधि के समक्ष खड़ा होगा और वर्तमान में जिस तरह से केंद्र सरकार एफसीआरए संशोधन बिल लाई है और उसका विरोध अमेरिका में सीनेटर ने भी किया है तो ईसाई समुदाय के साथ जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी शासित प्रदेशों में भेदभाव किया जा रहा है कहीं ना कहीं यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठेगा।