गाॅस मेमोरियल की भूमि बचाने जूझ रहा आईसीटी प्लेस ऑफ़ वर्शिप स्पेशल प्रोविजन एक्ट 1991 के तहत मिली जगह कैसे बदलेंगे लैंड यूज़
Wednesday, 08 Jul 2026 18:00 pm
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रायपुर/बिलासपुर, 08 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के हृदय स्थल में स्थित लगभग 200 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर *"गॉस मेमोरियल सेंटर"* की 2.5610 हेक्टेयर भूमि को अवैध तरीके से अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले ने पूरे मसीही समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है।
आईटीसी Indian Church Trustees ने आज तहसीलदार, नजूल शाखा के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि यह भूमि किसी भी स्थिति में शासकीय नहीं है, बल्कि यह मिशन की संपत्ति है और इसे हड़पने का कोई भी प्रयास कानूनी रूप से अमान्य होगा।
*इतिहास क्या कहता है?*
यह संपत्ति 19वीं शताब्दी में *AEM - American Evangelical Mission* द्वारा स्थापित की गई थी। रायपुर में ईसाई समाज के शैक्षणिक और धार्मिक कार्यों का केंद्र रही यह भूमि, ब्रिटेन सरकार के `Church of England` द्वारा सन *1927* में पारित *"Indian Church Act"* के तहत `Church of India` को निहित की गई थी।
देश के विभाजन के बाद *1947* और *1949* के संशोधन अधिनियमों के माध्यम से भारत सरकार ने भी इस व्यवस्था को बरकरार रखा। वर्तमान में भारत के संविधान और *Indian Church Act 1960* के अनुसार *ICT - Indian Church Trustees* को इस संपत्ति का एकमात्र कानूनी `Custodian` नियुक्त किया गया है।
1950 की AEM Directory में भी इसे स्पष्ट रूप से `Raipur - Gass Memorial Centre - A.E.M.` के नाम से दर्ज किया गया है।
*न्यायालय क्या कह चुका है?*
इस विषय पर माननीय न्यायालयों के स्पष्ट आदेश पहले से मौजूद हैं।
1. *माननीय सर्वोच्च न्यायालय - WPC 2013, WPC 2014*
2. *माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली - WPC 2009*
3. *हाल ही में - WPC 2024*
इन सभी प्रकरणों में न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि *Indian Church Trustees ही चर्च की समस्त संपत्ति के कानूनी Custodian हैं*। उनके लिखित आदेश के बिना किसी भी चर्च की भूमि का आवंटन, बिक्री या नामांतरण पूर्णतः अवैधानिक और शून्य होगा।
*वर्तमान विवाद क्या है?*
कार्यालय तहसीलदार, नजूल रायपुर द्वारा जारी ईश्तहार के माध्यम से खसरा नं. 732, प.ह.नं. 00062 स्थित "गॉस मेमोरियल खेल मैदान" की 2.5610 हेक्टेयर भूमि को "शासकीय भूमि" बताकर *मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना* के तहत नगर पालिक निगम रायपुर के नाम आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
ICT का आरोप है कि इस प्रक्रिया में न तो Indian Church Trustees को पक्षकार बनाया गया और न ही उन्हें कोई नोटिस दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।
इसके अलावा *Places of Worship (Special Provisions) Act 1991* की धारा 3 के अनुसार 15 अगस्त 1947 को जो पूजा स्थल जिस धार्मिक स्वरूप में था, उसे बदला नहीं जा सकता। रिकॉर्ड और मौके की स्थिति से स्पष्ट है कि यह भूमि 1947 में "चर्च" के रूप में थी। इसे "खेल मैदान" के नाम से आवंटित करना उक्त केंद्रीय अधिनियम का उल्लंघन है।
*आज तहसील में क्या हुआ?*
आज दिनांक *08/07/2026* को नजूल शाखा के तहसीलदार नरेन्द्र कुमार वर्मा के समक्ष Indian Church Trustees के प्रतिनिधिमंडल ने समस्त आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
इस अवसर पर *डॉ. बिशप अर्नेस्ट मिल्टन लाल - वाईस चेयरमैन, ICT*, *डॉ. बिशप विजय खाल्खो*, *रेव. रापू जार्ज* और *रेव. विमेश लाल* उपस्थित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार से मांग की कि आवंटन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और ICT को मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
*ICT पदाधिकारियों ने क्या कहा?*
बिशप डॉ. अर्नेस्ट मिल्टन लाल ने कहा, *"यह सब मिशन की भूमि है और हम इसकी रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। 1927 के एक्ट से लेकर आज तक यह संपत्ति Indian Church Trustees में निहित है। बिना हमारी NOC के कोई भी आवंटन कानून की नजर में नहीं टिकेगा।"*
*"हम शासन-प्रशासन से आशा करते हैं कि वे वैधानिक दृष्टि से मसीही समाज का सहयोग करेंगे और किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे।"*