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24hnbc खबर जो गायब की गई, केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मिली पर्यावरण की मंजूरी
Sunday, 05 Jul 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 6 जुलाई 2026। 
इस बीच छत्तीसगढ़ की पर्यावरणीय स्थिति को दूर तक प्रभावित करने वाली एक खबर प्रदेश के मीडिया से गायब रही। वह खबर थी हसदेव अरण्य के जंगल में स्थित केते एक्सटेंशन इंटीग्रेटेड कोयला ब्लॉक में खनन के लिए इसी ने पर्यावरणीय मंजूरी दे दी। इस परियोजना में प्रतिवर्ष 90 लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य है 24 जून को जारी या मंजूरी वैधानिक वन मंजूरी के तुरंत बाद आई। वन मंजरी 9 जून को मिली जंगल में मंजूरी पाने वाला यह तीसरा बड़ा कोयला क्षेत्र है। परसा ईस्ट केते बासन (पीईकेबी) ओपन कास्ट खदानी पहले से संचालित है। कभी हसदेव के इन जंगलों को वन और वन्य जीव संरक्षण के लिए खनन निषेध नो गो क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था। 
सरगुजा जिले में 1760 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला या कोयला ब्लॉक 2015 में राजस्थान विद्युत उत्पादक निगम को आवंटित हुआ। अदानी समूह इन खदान का डेवलपर और ऑपरेटर है यहां से निकल गया कोयला राजस्थान के छाबड़ा और सूरतगढ़ ताप विद्युत संयंत्र को भेजा जाएगा। 1502 वर्ग किलोमीटर में फैला हसदेव अरण्य कोयला क्षेत्र मध्य भारत का सबसे बड़ा घने जंगलों में से एक है। इस क्षेत्र में हाथी, तेंदुआ, बाघ सहित दर्जनों वन्य जीवों का आवास है। स्थानीय आदिवासी समुदायों और कांग्रेस ने इस परियोजना का घोर विरोध किया। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार परियोजना के लिए 1742.6 हेक्टर वन्य भूमि का डायवर्सन किया जाएगा। 4.48 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है पर जानकारी बताते हैं कि इससे बहुत अधिक मात्रा में वृक्षों की कटाई होगी और वृक्षारोपण का आंकड़ा भी बहुत कम होगा।