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24hnbc अदालती आदेश पर हुई एफआईआर, समाज से निकल जाने पर राजधानी में धूल खा रहा आवेदन पत्र
Friday, 03 Jul 2026 18:00 pm
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रायपुर/बिलासपुर, 4 जुलाई 2026। 
बिलासपुर जिले के कोटा क्षेत्र से एक ऐसा समाचार आया है जो पूरे प्रदेश के ईसाई समाज और उसके पदाधिकारियों को आईना दिखाता है। कोर्ट के आदेश पर कोटा थाना ने सोशल मीडिया में बहिष्कार करने का आदेश वायरल करने वाले सीएनआई के पदाधिकारी के खिलाफ जुर्म दर्ज किया है। एफआईआर प्रशिक्षण डीएसपी ने दर्ज की और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 की धारा 7(2) आईटी अधिनियम 2008 की धारा 66 बीएनएस की धारा 196, 1 बी, 196, 2, 352, 353,2, 353,3, 356,2 के तहत जुर्म दर्ज कर लिया है। अब इस मामले से जोड़कर रायपुर के थाना सिविल लाइन में पेंडिंग एक शिकायत को जोड़ें। इस शिकायत में कुल 45 हस्ताक्षर हैं और यह शिकायत थाने को 23.7.2025 को दी गई। आवेदक ने कहा कि छत्तीसगढ़ डायोसिस के सचिव नितिन लॉरेंस, बिशप सुषमा कुमार द्वारा प्रार्थियों को समाज से बहिष्कृत कर दिया। पत्र में उन्होंने बताया है कि यह किस तरह भारतीय संविधान के और चर्च ओफ नॉर्थ इंडिया के खिलाफ हैं। सभी हस्ताक्षर कर्ताओं ने ऐसी ही एक शिकायत 28.7.2025 को अल्पसंख्यक आयोग छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष को दी। 1 साल उपरांत भी इन दोनों पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है ऐसे में प्रश्न उठता है कि दर्जनों की संख्या से एक धार्मिक संगठन अपने सदस्यों को उनके मौलिक अधिकार, धार्मिक अधिकार और संस्कार से वंचित कर देता है उन्हें और उनके पूरे परिवारों को उनकी प्रतिष्ठा से विरक्त कर देता है पर शासन 
, प्रशासन, आयोग ऐसे मामलों में संज्ञान नहीं लेते पर जब स्थिति धर्मांतरण संबंधी शिकायत की होती है तो कार्यवाही की गति वंदे भारत के समान होती है। 
कानून के जानकार बताते हैं कि ऐसे मामलों में यदि आवेदक बड़ी अदालत में आता है तो बड़ी अदालतें अल्टरनेट रेवेड़ी होने के कारण याचिका को खारिज कर देता है। कहां जाता था कि बीएनएस न्याय संहिता लागू होने के बाद किसी भी शिकायत पर जांच अधिकारी को निश्चित समय सीमा के भीतर निराकरण करना ही होगा पर यहां तो 45 लोगों के हस्ताक्षर वाला आवेदन पत्र 1 साल पुराना हो गया ऐसे में बीएनएस के प्रावधानों पर भी संदेह होता है। यह भी लगता है कि पुलिस अधिकारी किसी भी मामले को जब तक उनकी इच्छा हो टाल सकते हैं और और रही बात आयोग की आयोग का गठन ही इसलिए हुआ कि अल्पसंख्यक अपनी बात आयोग के पास रखकर उसका शीघ्र और सम्मानजनक निदान कर पाएंगे पर 1 साल पुरानी शिकायत पर आवेदकों ने बताया कि आज तक आयोग की तरफ से कोई सूचना या जानकारी नहीं आई।