24hnbc नकटी विकास का “वेनेज़ुएला मॉडल”— अमित जोगी
Wednesday, 01 Jul 2026 18:00 pm
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रायपुर/बिलासपुर, 2 जुलाई 2026।
आज नकटी गया। लगा, भूकंप वेनेज़ुएला में नहीं, यहीं आया है। बुलडोज़रों से रौंदे गए घर, चारों ओर मलबा, 1000 जवानों की पुलिस छावनी — और बीच में एक पेड़ के नीचे 80 परिवार, लगभग 300 गाँव वाले। मज़दूर, चरवाहे, सीधे-सादे लोग — जो पिछले 50 वर्षों से शांति से रह रहे थे। फिर एक शाम अचानक क़यामत आ गई।
सरकार ने इनके लिए नवा रायपुर के सेक्टर 30 में “शानदार” इंतज़ाम किया है: चौथी मंज़िल पर 1 BHK फ्लैट, जहाँ 10–15 लोगों का परिवार और उनके मवेशी रहेंगे। गाय लिफ्ट से चढ़ेगी या सीढ़ियों से, यह अभी तय नहीं हुआ।
व्यवस्था इतनी उत्तम है कि गाँववालों ने भी एक उदार प्रस्ताव दिया है: यह सुख माननीय मुख्यमंत्री जी और मंत्रिगण स्वयं ले लें। वे सपरिवार सेक्टर 30 में पधारें, और गाँववाले मुख्यमंत्री निवास तथा मंत्री बंगलों के “गरीबखानों” में किसी तरह गुज़ारा कर लेंगे। सौदा बराबरी का है। है न?
और क़ानून? मोहर्रम के दिन 48 घंटे का नोटिस — उसके बाद लगातार चार छुट्टियाँ — ताकि कोई अदालत का दरवाज़ा भी न खटखटा सके। तहसीलदार का मनमाना आदेश, और भरी बरसात में बेदख़ली की ऐसी हड़बड़ी — आख़िर किसके लिए?
बाबासाहेब का संविधान आज उस पेड़ के नीचे बैठे उन 300 लोगों के साथ भीग रहा है।
इसीलिए आज मैं नकटी गया — एक और विपक्षी नेता बनकर नहीं (वे अपने जीवन भर के नेता देख चुके हैं!) — बल्कि एक वकील बनकर, जो आज भी मानता है कि सुरंग के अंत में रोशनी है।