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24hnbc यूपी में आज भी जारी है बंधुआ मजदूरी
Monday, 29 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 30 जून 2026। 
छत्तीसगढ़ के हजारों मजदूर उत्तर प्रदेश ईट भट्टों पर काम करने जाते हैं और यही हाल बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा के मजदूरों का भी है। पर अब वह समय नहीं है कि बंधुआ मजदूर उन्मूलन कानून की कोई बात करें। और न इस पर अमल होता दिखता है। ऐसी कोई ठोस योजना नहीं की छत्तीसगढ़ की सरकार अपने प्रदेश के मजदूरों के हित में इस कानून का कड़ाई से पालन कराये। कई बार तो ईट भट्टे पर काम करने वाले मजदूर को छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी कुशल श्रमिक तक कह देते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत बंधुआ मजदूर प्रथा को निशिद घोषित किया गया है। फिर भी बंधुआ मजदूरों को प्रतिबंधित करने में 26 साल और लगे और 1976 पर बंधुआ मजदूर कानून लागू हुआ। 
हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर नगर के मांडी गांव में 12 बंधुआ मजदूर छुड़ाए गए। वहां पर बाल बंधुआ मजदूर भी मिले हैं। बिलासपुर जिले की मस्तूरी ब्लॉक से सर्वाधिक पलायन होता है। कोविड के आंकड़े बताते हैं कि 4 लाख मजदूर उसे समय मस्तूरी वापस आए थे। मस्तूरी ब्लॉक से खेती का काम खत्म होते ही मजदूरों का परिवार सहित पलायन शुरू हो जाता है। बताया जाता है कि दो ट्रेनें इनके पलायन का जीवंत उदाहरण है। एक साप्ताहिक ट्रेन जम्मू तवी और दूसरी सारनाथ अब तो मजदूरों को जाने के लिए सड़क मार्ग से आरक्षित बस भी चलने लगी हैं। इस समाचार पर जिन्होंने जब कभी भी काम किया उन्हें या बाद सीधे समझ आती है कि बस मालिक पूर्व पुलिस कर्मचारी है और छत्तीसगढ़ में उनकी एक दो बस का नहीं सैकड़ो बस का बेड़ा है। बंधुआ मजदूर की खबर तभी बनती है जब जब वह बंधक होने के बाद अपने ईट भट्टे से चिट्ठी लिखने में कामयाब हो जाता है। मुआवजा राशि बंधक बने जिले के प्रशासन को अदा करना पड़ता है इस कारण सबसे पहले वहां की सरकार बंधुआ मजदूर के होने से ही इंकार करती है आखिर डबल इंजन के नाक काटने का सवाल है।