तभी आईपीएस उनके दबाएंगे चरण भारत के युवाओं के लिए एक ही रास्ता कांवर उठाएं और चल दे
Tuesday, 23 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 24 जून 2026।
10 साल में इंडिया से भारत बनते हुए देश ने बिजनेस मॉडल के रूप में मंदिरों को अपना लिया या यूं कहे भारत का मंदिर बिजनेस मॉडल है। अयोध्या, बनारस, उज्जैन, यह सब इस बिजनेस मॉडल के उदाहरण हैं। इस बिजनेस मॉडल ने सबसे बड़ा नुकसान शेयर मार्केट का किया। खुदरा निवेशक एक साल के भीतर 87 लाख से 96 लाख के बीच गायब हो गए। इन शेयर धारकों को जून माह में ही, 1 लाख करोड़ का घाटा हुआ है। सिलसिले बार दिखे तो 2022 में 40000 करोड़, 2023 में 65000 करोड़, 24 में 75000 करोड़ और अब एक लाख करोड़। भारत में भ्रष्टाचार पॉलिसी की शक्ल में सामने आ चुका है। अब करप्शन ही हमारी पॉलिसी है। शेयर मार्केट के खुदरा निवेशकों का जिक्र हमने इसलिए किया की मार्केट से छोटे निवेशक घटा खाकर बाहर हो गए तो वो भरोसा कि विदेशी निवेशक चले जाएंगे तो खुदरा निवेशक तो बाजार को बचा लेंगे यह भ्रम टूट गया है। पहले अयोध्या फिर उज्जैन ये खबरें खोज कर निकल नहीं गई है दे दी गई है। विपक्ष में यदि राहुल गांधी को माइनस कर दें तो विपक्ष नहीं दिखाई देता और यही हाल सत्ता पक्ष का है यदि चुनाव जीतने की मशीन प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को माइनस कर दिया जाए तो सत्ता पक्ष दिखाई ही नहीं देता। सीधा अर्थ है किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री किसी काम का नहीं है। उसके चेहरे पर वोट नहीं पड़ता जिनके चेहरे पर वोट पड़ जाता था उन्हें तो पहले ही हटा दिया। मध्य प्रदेश के शिवराज सिंह इसका उदाहरण है तो उज्जैन का घोटाला हो या अयोध्या का और भविष्य में आने वाला बनारस का घोटाला खोज कर नहीं निकाली जा रही है। सत्ता पक्ष के कैंप से ही दी जा रही है सीधा अर्थ है कि चेहरे बदलने वाले हैं। अरावली की पहाड़ी, हसदेव अरण्य की पहाड़ी या अंडमान एंड निकोबार के खिलाड़ी को तो बदल ही नहीं जा सकता तो बदलने के लिए मुख्यमंत्री बेहतर पात्र हैं। इससे ध्यान हटाया जा सकता है। बाजार का एक और सच जान लीजिए भारत का निर्यात चौपट हो रहा है। भारत अमेरिका को जो निर्यात करता था उसमें 40 फ़ीसदी की गिरावट आ गई और अमेरिका जो माल भारत को भेजा था। उसमें 100% की वृद्धि दर्ज हुई है । अमेरिका से आने वाले ताजा फल के आयात का उदाहरण देखें पिछले साल मार्च में अमेरिका ने भारत को 113 मिलियन डॉलर के फल भेजें और अभी मार्च में 131 मिलियन डॉलर के जबकि भारत में अमेरिका को पिछले साल मार्च में 115 मिलियन डॉलर के फल भेजे थे और अभी मार्च में 101 मिलियन डॉलर के भेजें यह एक उदाहरण है कि अमेरिका का माल भारत के बाजार में तेजी से पैर पसारेगा। भारत के कोर सेक्टर की हालत खराब है आंकड़े बताते हैं की कोर सेक्टर में गिरावट 9.3% की है। क्रूड मिल में गिरावट माइंस 4.9 की है। और फर्टिलाइजर ने तो हमारे ग्रोथ की बैंड बजा दी - 1%, इन्हें सबके साथ परीक्षा और शिक्षा के भ्रष्टाचार में युद्ध के कारण खड़े कर दिए और उनके माता-पीताओं को एक ही रास्ता है कांवर उठाएं और यात्रा पर चल दें, तभी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उनके यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाएंगे और शाम को उनके तलवे दबाएंगे।