24 HNBC News
24hnbc ठूंठ 250 से ज्यादा, जांच में सिर्फ 25 जांच अधिकारी की जांच पर लगा प्रश्न चिन्ह
Sunday, 21 Jun 2026 18:00 pm
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
बलौदाबाजार, 22 जून 2026।
बलौदाबाजार वनपरिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाला धमनी बीट इन दिनों सागौन वृक्षों की अवैध कटाई और उससे भी ज्यादा विवादित जांच रिपोर्ट को लेकर सुर्खियों में है। सवाल केवल सैकड़ों पेड़ों की कटाई का नहीं है, बल्कि उस जांच का है जिसमें जमीन पर दिखाई दे रहे सैकड़ों ठूंठों के बावजूद वन विभाग की जांच टीम को मात्र 25 पेड़ ही कटे हुए नजर आए। पूरा मामला तब सामने आया जब पत्रकारों द्वारा धमनी जंगल में 200 से अधिक सागौन वृक्षों की अवैध कटाई का खुलासा किया गया। समाचार प्रकाशित होने के बाद वन विभाग हरकत में आया और वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुश्री एकता कर के नेतृत्व में जांच कराई गई। लेकिन जांच रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। वन अपराध प्रकरण क्रमांक 15649/03 दिनांक 17 जून 2026 में केवल 25 सागौन वृक्षों के ठूंठ पाए जाने तथा उनमें भी मात्र 6 ठूंठ नवीन रूप से कटे होने की बात दर्ज कर दी गई।
*यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया*
वन विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद पत्रकारों की टीम दोबारा धमनी जंगल पहुंची। इस बार केवल निरीक्षण नहीं बल्कि एक-एक कटे हुए ठूंठ की ऑन रिकॉर्ड गिनती की गई। पत्रकारों के कैमरों में केवल मुड़ियाडीह क्षेत्र के लगभग एक वर्ग किलोमीटर हिस्से में ही 250 से अधिक कटे हुए सागौन वृक्ष रिकॉर्ड हुए। जिनमे सैकड़ों ठूंठ ताजा कटाई के मिले। गिनती आगे बढ़ती गई लेकिन ठूंठों की संख्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पत्रकारों को कैमरे के सामने 250 से अधिक ठूंठ दिखाई दे गए तो वनपरिक्षेत्र अधिकारी की जांच टीम को केवल 25 पेड़ ही कैसे मिले? क्या जांच वास्तव में स्थल पर की गई थी?
क्या पूरे क्षेत्र का निरीक्षण हुआ था?
या फिर जांच का उद्देश्य वास्तविक नुकसान का आंकलन करने के बजाय किसी को बचाना था?
इन सवालों का जवाब वन विभाग के पास फिलहाल नहीं है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीट गार्ड की गंभीर लापरवाही को बचाने के लिए पूरे मामले की लीपापोती की गई। लोगों के बीच चर्चा इस बात की भी है कि आखिर ऐसा कौन सा चमत्कार हुआ कि 200 से अधिक पेड़ों की कटाई की खबर जांच तक पहुंचते-पहुंचते केवल 25 पेड़ों में सिमट गई। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच जांच रिपोर्ट उपहास का विषय बन चुकी है। कोई इसे टेबल जांच बता रहा है तो कोई फाइलों में जंगल बचाने का खेल कह रहा है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कोई सामान्य वृक्ष नहीं बल्कि सागौन जैसे अत्यंत मूल्यवान वृक्ष हैं। निजी भूमि पर लगे सागौन वृक्ष को काटने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्र में सैकड़ों सागौन वृक्ष कट गए और जिम्मेदार विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे वन सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है।
धमनी जंगल मानो स्वयं सवाल पूछ रहा है कि जिस जंगल की रक्षा के लिए सरकारी अमला वेतन ले रहा है, उसी जंगल में महीनों तक कुल्हाड़ियां चलती रहीं और जिम्मेदार लोग सोते रहे। और जब इंसाफ करने का समय आया तो कटे हुए पेड़ों की संख्या ही कम कर दी गई।
वन विभाग की जांच रिपोर्ट और पत्रकारों के कैमरों में दर्ज वास्तविकता के बीच का यह भारी अंतर अब पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है। यदि जमीन पर 250 से अधिक ठूंठ मौजूद हैं तो 25 पेड़ों की जांच रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई? क्या जांच अधिकारी ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया था? यदि किया था तो शेष सैकड़ों ठूंठ रिपोर्ट से गायब क्यों हैं? कटे पेड़ों की गिनती में 10 गुना अंतर, क्या बिना सेटिंग संभव है ऐसा चमत्कार? जांच अधिकारी को दिखाई नहीं दिए पेड़ या दिखाना नहीं चाहा गया? जांच रिपोर्ट पर लग रहा कमीशनखोरी आरोप लोग कह रहे जांच की निष्पक्षता बिक गई?
अब यह मामला केवल बीट गार्ड की लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल जांच अधिकारी वनपरिक्षेत्र अधिकारी सुश्री एकता कर की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इतने बड़े अंतर के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे समस्त प्रमाणों और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ राजधानी का रुख करेंगे तथा उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।
धमनी जंगल के सैकड़ों कटे सागौन वृक्ष आज भी वहीं खड़े ठूंठों के रूप में गवाही दे रहे हैं। अब देखना यह है कि न्याय उन ठूंठों की गिनती के आधार पर होगा जो जमीन पर मौजूद हैं या फिर उन आंकड़ों के आधार पर जो फाइलों में लिख दिए गए हैं।