24hnbc मिशन स्कूल की प्राचार्य पर लगाए गए समस्त आरोप बेबुनियाद व निराधार .... जांच कमेटी
Friday, 19 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 20 जुलाई 2026।
गौरतलब है कि मिशन स्कूल के प्रबंधन समिति में दो पक्षो के बीच लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई थी, लोक शिक्षण संचनालय व जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा समस्त आरोप को गंभीरता से लेकर जांच के आदेश जारी किए, गौरेला पेण्ड्रा व मरवाही के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारीयो व प्राचार्य की टीम गठित कर विभिन्न विषय के साथ जांच के आदेश जारी किए गए। सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच अधिकारियों द्वारा शाला में उपस्थित होकर शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों से बयान लिया व प्राप्त समस्त दस्तावेजो के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार किया। चुकी मिशन स्कूल शासकीय अनुदान प्राप्त शाला है अतः शासकीय नियमो का पालन नियुक्ति तबादला निलंबन व बर्खस्तगी में किया जाना अनिवार्य है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि श्रीमती भावना आर्थर 2018 से मिशन स्कूल में प्रभारी प्राचार्य के पद पर कार्यरत है जिनके द्वारा शाला हित मे सहोर्दपूर्ण सद्भावना के साथ कार्य सम्पन्न किया जाता है, उन पर सुनील श्रीवास व अन्य द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद व झूठा है। जांच कर अपने अभिमत पर जांच अधिकारियों ने लिखा है कि अगस्त 2025 को समिति के अनाधिकृत पदाधिकारीयो द्वारा नियम के विपरीत भावना आर्थर को प्राचार्य पद से हटा कर शाला के सबसे कनिष्ठ शिक्षक सुनील श्रीवास को प्राचार्य बनाया दिया गया था, जबकि तब प्रबंधन समिति के कार्यो पर स्थगन आदेश था, जिसकी शिकायत करने पर न्यालय की अवमानना मानते हुवे न्यालय ने समिति के समस्त आदेशो को निरस्त कर दिया गया, आदेश के अनुसार भावना आर्थर का पद नियमानुसार यथावत है। चुकी भावना आर्थर समाजिक कार्यो में अपनी अग्रणी भूमिका निभाती है अतः अगस्त माह में उन्हें नशामुक्ति कार्यक्रम में भारत देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला जिस पर प्रबंधन को धोखा देकर प्रशासन को गुमराह कर विदेश जाने की शिकायत प्राप्त हुई जिस पर बेहद गंभीरता पूर्वक जांच किया गया और पाया कि विदेश प्रवास हेतु भावना आर्थर द्वारा बकायदा जिला शिक्षा अधिकारी से प्रशासकीय अनुमति व छुट्टी हेतु स्वीकृति प्राप्त कर ही विदेश गयी थी। विदेश प्रवास की अनुमति की जानकारी प्रबंधन की तात्कालिक अध्यक्ष को प्रदान की थी व जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से भी अनुमति की प्रतिलिपि विभाग की ओर से अध्यक्ष छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन रायपुर को प्रदान किया गया था। इस तरह विदेश प्रवास से संबंधित समस्त आरोप निराधार साबित हुवे।
*मिडिल के कनिष्ठ शिक्षक को हायर सेकेंडरी का प्राचार्य बनाना नियम विपरीत*
चुकी सुनील श्रीवास अपने को प्राचार्य मानते है अतः जांच की गई तो पाया गया कि समिति के अनाधिकृत पदाधिकारी जयदीप रॉबिन्सन जो न्यालय द्वारा फ्रॉड घोषित है व सुषमा कुमार द्वारा सुनील श्रीवास को अवैध तरीके शाला में बालात कब्जा करवाकर, *स्कूल की जमीन बेचने की मंशा से* भावना आर्थर को हटाकर सुनील श्रीवास को प्राचार्य नियुक्त कर दिया किया था, जो शिक्षा अधिनियम के अनुसार पूर्णतः नियम के विपरीत है।
जांच अधिकारीयो ने सुनील श्रीवास के बारे में अपने रिपॉर्ट में लिखा है कि सुनील श्रीवास स्वयं एक अनुशासनहीन शिक्षक है व द्वेषपूर्ण ढंग से प्रभारी प्राचार्य पर लगाये गए सभी आरोप बेबुनियाद एवं झूठा है, सुनील श्रीवास का शाला के अन्य शिक्षक व बच्चों के साथ व्यवहार अच्छा प्रतीत नही होता है, इसके आगे *जांच समिति गम्भीर बात कहती है कि सुनील श्रीवास का शाला में रहने से वातावरण तनावपूर्ण रहता है शाला के शैक्षणिक दृष्टिकोण से शाला में बने रहना उचित नही है।* चुकी सुनील श्रीवास पर शाला में लैंगिक प्रताड़ना की भी शिकायत शिक्षा विभाग व पुलिस थाने में दर्ज है अतः
उक्त वक्तव्य को संज्ञान में लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को बालिकाओं व महिला कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुवे तत्काल कठोर निर्णय लेना चाहिए।
*शाला की प्रबंधन समिति छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन का विवाद उच्च न्यालय में लंबित*
शाला की प्रबंधन समिति का दो पक्षो के बीच विगत 2 वर्षों से विवाद चल रहा है, वर्तमान में हुवे निर्वाचन को अवैध घोषित करने हेतु माननीय उच्च न्यालय में चुनौती दी गयी है, साथ ही सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी अनुसार फर्म एवं संस्थाए छत्तीसगढ़ द्वारा विवाद , शिकायत व मामला उच्च न्यालय में लंबित होने से चुनाव पश्चात पदाधिकारियों की सूची जारी नही की गई है। अतः वर्तमान तथाकथित समिति व पदाधिकारियों को शाला संचालन का अधिकार प्राप्त नही है। प्राप्त जानकारी अनुसार समिति के अधिकारविहीन पदाधिकारियों द्वारा विभिन शालाओ में बालात प्रवेश कर ताला तोड़कर कब्जा करने का अवैध कार्य कर रहे है जो गैरकानूनी है।