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24hnbc तीन बार नहीं पांच बार करवा देते प्रार्थना असल मुद्दा छात्रों में वैज्ञानिक सोच का विकास कब करेंगे
Friday, 19 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 20 जून 2026। 
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में दिन में तीन बार प्रार्थना होगी। गायत्री मंत्र पढ़ा जाएगा, राष्ट्रगीत राष्ट्रगान होगा, हमारा एक ही प्रश्न है... छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान की निहित भावना, वैज्ञानिक सोच का निर्माण कब कराया जाएगा। हम बात कर रहे हैं आर्टिकल 25, 51ए के लिए।
 सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में तीन बार राष्ट्रगान, भजन, गायत्री मंत्र जैसे संस्कृत श्लोक का सामूहिक पाठ अनिवार्य कर दिया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने 13 जून को एक टाइम टेबल भी जारी किया है। जो आदेश जारी हुआ है उसमें कहा गया है कि दिन की शुरुआत राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत , दीप मंत्र, ज्ञान, समृद्धि और अंधकार को दूर करने के प्रतीक के रूप में हिंदू रीति रिवाज में दीप जलाते समय लोग बोला जाने वाला संस्कृत श्लोक, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, अज्ञानता को दूर करने और ज्ञान का प्रकाश लाने वाले गुरु की स्तुति में गाए जाने वाला मंत्र किसी महान व्यक्ति की जीवन कहानी पर शिक्षा के सामूहिक गायन पाचन से होगी। लंच ब्रेक के बाद भजनों का सामूहिक गायन होगा । आदेश कहता है कि स्कूल की छुट्टी के पहले राष्ट्रगीत और गायत्री मंत्र के सामूहिक पाठ होंगे इस सबसे पढ़ाई के अलावा छात्रों में अनुशासन, देश देश भक्ति, नैतिक मूल्य, और भारतीय परंपरा और संस्कृति के प्रति जागरूकता विकसित होगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि निर्देश का पालन न करने वाले स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजमेंट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी । यह आदेश सभी सरकारी गैर सरकारी स्कूलों पर लागू होगा। अब सवाल बार-बार यही उठता है कि संस्कृत शिक्षा के नाम पर सभी छात्रों के लिए किसी धर्म विशेष की प्रार्थना कैसे लागू की जा सकती है इसका अर्थ यह हुआ कि राज्य किसी एक धर्म को बढ़ावा दे रहा है और दूसरे को नजर अंदाज कर रहा है। यह तो संविधान के उसे कंडिका का उल्लंघन है जो कहती है कि नागरिक को पसंद का धर्म पालन करने की आजादी होगी। स्कूलों में सभी जाति धर्म के बच्चे पढ़ते हैं। किसी बच्चे को धार्मिक रीति-रिवाज परंपराओं में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसे में छत्तीसगढ़ के भीतर ऐसे बहुत से संगठन है जो इस सर्कुलर को वापस लेने के लिए कह रहे हैं। और दूसरी और कई ऐसे संगठन हैं जो इस गैर संवैधानिक आदेश की आलोचना कर रहे हैं। यहां एक बात याद रखना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ के आत्मानंद स्कूलों में अटल लैब पर करोड़ों रुपए का बजट खर्च हुआ था क्या वहां भी टेस्ट ट्यूब और वैज्ञानिक उपकरणों के स्थान पर हवन की सामग्री और वेद पुराण रखकर या खोज की जाएगी की आराध्य देव मर्यादा पुरुषोत्तम राम का पुष्पक विमान किस मंत्र के उच्चारण से गतिमान होता था। या आजीवन ब्रह्मचर्य की कसम खाने वाले भीष्म पितामह ने कसम खाने के पूर्व जिन तीन राजकुमारी का हरण किया था उसे समय कौन से तीर चलाए थे। और उन तिरो का संधारण किस मंत्र से किया था। इस विषयों को पढ़ने वाले शिक्षक किस संगठन से ले जाएंगे और क्या वे शिक्षक बीएड होंगे...? कुछ आलोचकों ने यह भी पूछा है कि निकट भविष्य में शाला गणवेश कब बदली की जा रही है और धोती पूरे हफ्ते पहनवाई जाएगी या सिर्फ एक दिन। महाभारत की परंपरा के अनुसार धोती के साथ अंग वस्त्र होगा और छात्र कौन-कौन सी माला धारण करेंगे। क्योंकि सनातन परंपरा तो कंठ में रुद्राक्ष की माला पहनने का आदेश देता है। ऐसे में शहर के गणवेश निर्माता के बीच खलबली मची है कि यदि पेंट और शर्ट हटाकर भारतीय परंपरा के अनुसार गणवेश बना दी तो उनके करोड़ों का नुकसान हो जाएगा।