24hnbc मृत महिला के नाम पर 3 वर्षों से उठ रहा था राशन, शिकायत सही अब कार्यवाही
Friday, 19 Jun 2026 18:00 pm
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बलौदाबाजार, 20 जून 2026।
जिले के लवन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत धनगांव में मृत महिला के नाम पर वर्षों से शासकीय राशन उठाए जाने का मामला सामने आया है। पंचायत सदस्य द्वारा कलेक्टर को की गई शिकायत के बाद खाद्य विभाग की जांच में आरोप सही पाए जाने की पुष्टि हुई है। मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शिकायतकर्ता एवं पंचायत सदस्य देवेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर से शिकायत कर गांव में मृत व्यक्तियों के नाम पर राशन वितरण किए जाने की जांच की मांग की थी। शिकायत के अनुसार स्वर्गीय जुग बाई तथा मेलन बाई के नाम से राशन कार्ड अब भी सक्रिय थे और इन कार्डों के माध्यम से पिछले लगभग तीन वर्षों से ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण कर नियमित रूप से चावल का उठाव किया जा रहा था।
देवेंद्र यादव ने बताया कि जब उन्होंने संबंधित परिवारजनों से पूछताछ की तो उन्होंने स्वयं राशन प्राप्त करने से इनकार किया। उनका कहना था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके नाम पर राशन का उठाव कौन कर रहा था।
धनगांव निवासी संतु राम सोनवानी ने बताया कि उनकी माता स्वर्गीय जुग बाई का निधन लगभग चार वर्ष पूर्व हो चुका है। उन्होंने कहा कि माता की मृत्यु के बाद उन्होंने एक भी बार राशन नहीं लिया तथा राशन कार्ड पंचायत में जमा करा दिया था। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब शासकीय उचित मूल्य दुकान धनगांव के संचालक केशव ध्रुव ने दावा किया कि जुग बाई पति लैनदास तथा मेलन बाई पति चैतराम के राशन कार्डों पर गांव के पूर्व सरपंच एवं वर्तमान जनपद सदस्य तुलसी मनहरे द्वारा ओटीपी के माध्यम से राशन का उठाव किया जाता था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राशन कार्ड के मुखिया की मृत्यु की जानकारी नहीं थी।
खाद्य निरीक्षक कमल नारायण साहू ने बताया कि शिकायत के आधार पर की गई जांच में आवेदन में लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है तथा जांच पूर्ण होने के बाद दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
मामले ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मृत व्यक्ति के नाम पर लंबे समय तक राशन कार्ड सक्रिय रहने और लगातार खाद्यान्न वितरण होने से विभागीय लापरवाही की आशंका भी जताई जा रही है। अब प्रशासनिक कार्रवाई पर ग्रामीणों की निगाहें टिकी हुई हैं।