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विभाग ने जारी किया नोटिस नियमों को ताक पर रखकर बिना डायवर्सन आवासीय कॉलोनी का निर्माण
Friday, 19 Jun 2026 18:00 pm
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बलौदाबाजार, 20 जून 2026।
 जिले में बगैर अनुमति के निजी कॉलोनी बनाए जाने के प्रकरण तो कई हुए हैं परंतु यदि कोई प्रतिष्ठित सीमेंट संस्थान बगैर शासन की अनुमति के अपनी निजी कॉलोनी का निर्माण करा ले तथा उसमें बड़ी संख्या में कंपनी के कर्मचारी निवास भी करने लगें तो यह स्पष्ट बताता है कि संयंत्र प्रबंधन को छ.ग.शासन के नियमों की तनिक भी परवाह नहीं है। यह बात सुनने में भले ही अजीब लगे परंतु जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के 10 किमी दूर स्थित श्री रायपुर सीमेंट संयंत्र में इसी प्रकार से बगैर छ.ग.शासन की अनुमति के निजी कॉलोनी तथा निजी स्कूल का निर्माण तो कराया गया है तथा बकायदा बीते तीन चार वर्षों से इन कॉलोनी में सैकड़ो कर्मचारी सपरिवार निवास भी कर रहे हैं।
 
विदित हो 30 मार्च 2017 को भारत सरकार के पर्यावरण, वानिकी और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ग्राम सेमराडीह भरूवाडीह स्थित एक सीमेंट संयंत्र को उत्पादन क्षमता 4.8 मिलियन टीपी से 8.6 मिलियन टीपी वृद्धि हेतु पर्यावरणीय स्वीकृति दी गई थी। 10 पृष्ठ के स्वीकृति पत्र के पेज न 02 के नं 6 कंडिका में उल्लेख है कि संबंधित संयंत्र का खनन पट्टा क्षेत्र के दो ग्रामों के मध्य सेमराडीह तथा भरूवाडीह में स्थित है। खनन पट्टा क्षेत्र के गैर खनिज क्षेत्र में आवासीय कालोनी प्रस्तावित है। कालोनी का कुल क्षेत्रफल 22 हेक्टेयर होगा जिसमें 33 प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया जाएगा। कुल 751 आवासीय इकाइयां निर्मित की जाएंगी जिनका क्षेत्रफल निर्मित क्षेत्रफल 1,11,011 वर्ग मीटर होगा। संयंत्र को कॉलोनी में सभी आवश्यक सुविधाएं जैसे विद्यालय, मंदिर, शापिंग काम्पलेक्स, चिकित्सा, स्वास्थ्य केन्द्र, क्लब हाउस, सीवेज उपचार तथा सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। कालोनी के लिए कुल जल आवश्यकता 115 होगी तथा घरेलू अपशिष्ट जल का उपचार 300 केएलडी क्षमता वाले एसटीपी में किया जाएगा।
 
बगैर विकास अनुज्ञा के कर लिया कॉलोनी निर्माण
 
श्री रायपुर सीमेंट संयंत्र द्वारा इसी कॉलोनी के निर्माण के लिए शासन के सभी नियमों को पूरी तरह से दरकिनार किया गया है। गौरतलब हो कि किसी भी भवन अथवा आवासीय कॉलोनी के निर्माण हेतु पहले संबंधित निर्माण कार्य का ले आउट टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से पास कराने के अलावा भूमि का डायवर्सन उपरांत निर्माण अनुज्ञा प्राप्त करना होता है परंतु श्री सीमेंट संयंत्र प्रबंधन द्वारा पूरे नियम कायदे को धता बताते हुए केवल ले आउट पास करने की औपचारिकता निभाने के उपरांत बगैर डायवर्सन एवं बगैर भवन निर्माण अनुज्ञा के आवासीय कॉलोनी का निर्माण करा लिया गया यानि एक तरह से छ.ग. शासन से बगैर अनुमति तथा बगैर सारी औपचारिकताओं को पूरा किए ही आवासीय कॉलोनी का निर्माण करा लिया गया।
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बलौदा बाजार एवं उप संचालक टाउन एवं कंट्री प्लानिंग द्वारा संयंत्र प्रबंधन को कुछ दिनों पूर्व नोटिस जारी किया गया है जिसके बाद से ही संयंत्र प्रबंधन तथा जिला प्रशासन अन्तर्गत राजस्व विभाग में हल्ला मचा हुआ है। बताया जाता है कि इस मामले की गूंज मंत्रालय तक पहुंच गयी है जिसके बाद आवासीय कॉलोनी के बगैर अनुमति निर्माण किए जाने के चलते संयंत्र प्रबंधन नियमितीकरण हेतु करोड़ो रुपए जुर्माना अधिरोपित किए जाने की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है।
 
*छ.ग.शासन के नियमों की भी परवाह नहीं* 
 
 शासन से एमओयू कर अपना संयंत्र स्थापित करने वाले संयंत्र प्रबंधन इतने अधिक विशेषाधिकार का प्रदर्शन करते हैं कि संयंत्र स्थापना, कालोनी निर्माण एवं माइन्स के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र तक लेना जरूरी नहीं समझते हैं यानि सीधे सीधे संयंत्र प्रबंधन द्वारा छ.ग.शासन को ही चुनौती दी जा रही है। बगैर जमीन डायवर्सन एवं राजस्व विभाग से बगैर अनुमति लिए बिना ही बड़ी कालोनी एवं अन्य निर्माण कार्य करा लिए जाने के मामले के हाई प्रोफाइल होने की वजह से स्थानीय प्रशासन भी मामले में कुछ कहने से बचता नजर आ रहा है परंतु प्रदेश के राजस्व मंत्री के गृह जिले तथा विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत मामला होने से इस मामले की जमकर चर्चा हो रही है तथा सभी की निगाहें छ.ग.शासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।