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24hnbc बिलासपुर कोर्ट के आदेश को नहीं माना सिविल लाईन थाने ने
Tuesday, 16 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 17 जून 2026। 
बिलासपुर शहर हो या ग्रामीण थानों के टीआई मर्जी के मालिक लगते हैं। सिरगिट्टी थाना की कार्य शैली लगातार चर्चा का विषय बनती है। अब इसी कतार में व्हीआईपी थाना सिविल लाइन भी शामिल हो गया लगता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जिला बिलासपुर का यह ज्ञापन इसी और इशारा कर रहा है। कोर्ट के आदेश ने 14 मई 2026 को सिविल लाईन थाने को यह आदेशित किया था कि अभियुक्त जयदीप रॉबिंसन पिता एक एफ रॉबिंसन के विरुद्ध धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की जाए। 
न्यायालय का आदेश मिलने के बाद परिवादी के अधिवक्ता ने आदेश की कॉपी के साथ अन्य जरूरी दस्तावेज सिविल लाईन थाने को शौप दिए। आदेश में कहा गया था कि 16 जून को उपस्थित होकर एफआईआर कोर्ट को दें। इस संदर्भ में छत्तीसगढ़ डायोसिस बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारी ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता की और कोर्ट के आदेश की कॉपी पत्रकार वार्ता में प्रधान भी की। 16 जून को संबंधित कोर्ट में सिविल लाईन थाना अनुपस्थित था। परिवादी ने अपने प्रकरण की फाइल खोजी तो उसे फाइल वहां नहीं मिली। खोजे जाने पर परिवार रिकॉर्ड रूम में मिला। थाने द्वारा एफआईआर करके उपस्थित न होना बगैर आदेश के परिवाद रिकॉर्ड रूम चले जाना अपने आप में अचरज की बात है। 
न्यायालय ने सिविल लाईन थाना टीआई को जो ज्ञापन प्रेषित किया है उसमें स्पष्ट लिखा है कि एफआईआर का आदेश पूर्व में भी दिया गया है और इस बार 7 दिन के भीतर फिर दर्ज कर उपस्थित हो, न दर्ज किया जाना अवमानना की श्रेणी में आएगा। बिलासपुर सिविल लाईन थाने में जयदीप रॉबिंसन के खिलाफ नजूल अधिकारी बिलासपुर, नगर पालिक निगम बिलासपुर द्वारा शासकीय काम में हस्तक्षेप की एक एफआईआर पूर्व में भी दर्ज है। कुछ ही दिन पूर्व बर्जेस स्कूल की प्राचार्य ने एक लिखित शिकायत की थी कि उनके कक्ष में अवैधानिक पदाधिकारी द्वारा जबरदस्ती ताला डाल दिया गया। लगता है कि अभियुक्त के साथ सिविल लाईन थाना बेहद मित्रता पूर्ण संबंध रखता है। संपत्ति संबंधी शिकायतों का मामला केवल सिविल लाईन थाने का नहीं है। इनके विरुद्ध थाना तारबहार में भी जमीनों पर धोखाधड़ी करके पैसे लेने की शिकायतें हैं। कोर्ट से जो आदेश जारी हुआ है वह भी यूसीएमएस का कथित पदाधिकारी बनकर नजूल की एक जमीन पर पैसा लेने के षड्यंत्र से संबंधित है। बेशकीमती जमीनों के धोखाधड़ी मामले में पुलिस का लापरवाही पूर्ण व्यवहार चर्चा का विषय बन जाता है।