24 HNBC News
24hnbc हुई है वही जो राम रुचि राखा, चढ़ावे में घपले की जांच न्याय संहिता के अंतर्गत नहीं आते
Monday, 15 Jun 2026 18:00 pm
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
बिलासपुर, 16 जून 2026। 
ब्रह्म ही सत्य है और जगत मिथ्या है, माया है ऐसे में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जिन्हें नानबायोलॉजिकल प्रधान सेवक लेकर आए के स्थान पर कोई आर्थिक गड़बड़ी चल रही है तो उसकी जांच साधारण न्याय संहिता के अंतर्गत नहीं की जा सकती... यदि की जाएगी तो इससे सनातन परंपरा का अपमान हो जाएगा। चढ़ावे की रकम का जो कुछ भी कथन किया जा रहा है वह सब माया है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के जिस आदेश से हुआ। उसे आदेश लेखन की प्रेरणा माननीय जस्टिस ने स्वयं बताया कि प्रभु ने दी। और आदेश में यह लिख भी दिया कि इस निर्णय को कहीं भी नजीर के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा अर्थात यह मंदिर निर्माण संविधान से ऊपर है, कानून से ऊपर है ऐसे में इस परिक्षेत्र के भीतर जो कुछ भी होगा उसकी जांच न्याय संहिता के अंतर्गत नहीं हो सकती। यदि चढ़ावे की रकम में कितनी भी गड़बड़ी हो वह प्रभु श्री राम और उनके भक्तों के बीच का मामला है। 
भारतीय परंपरा अनुसार इसका निर्णय तो गरुड़ पुराण के आधार पर ही होगा न्याय शास्त्र या न्याय संहिता इसमें नहीं आ सकती तभी तो प्रकृति ने मुख्य ट्रस्टी के रूप में उसे व्यक्ति को चुना जिसका नाम चंपत है। हिंदी की जानकारी रखने वाले साधारण व्यक्ति भी जानते हैं कि चंपत किस क्रिया को कहा जाता है। मंदिर परिसर में जो कुछ हो रहा है उसे विधि का लेखा माना जाना चाहिए हमारे शंकराचार्य सहित कुछ ज्ञानियों ने पहले ही कहा था कि बगैर ध्वजा का मंदिर लोकार्पण गलत है, जिस समय पर मंदिर का लोकार्पण किया जा रहा है वह समय उचित नहीं है, प्राण प्रतिष्ठा का समय उचित नहीं है तो जो कुछ गड़बड़ियां हो रही है तो इनका हिसाब यमराज के सेक्रेटरी को करने दिया जाए। 
चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी हमारे परंपरा का हिस्सा है। समय-समय पर इसकी खबरें आती रहती हैं और इसे यह मानकर छोड़ देना चाहिए की होइए वही जो राम रचि राखा। जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।