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24hnbc स्वास्थ्य से न्याय तक, विष्णु की असफलता अब बन रही है हैडलाईन
Friday, 12 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर , 13 जून 2026। 
एक समाचार महासमुंद से है और दूसरा रायपुर की डेट लाईन से है यह दोनों समाचार छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेज की बदहाली को दिखाते हैं। महासमुंद का मामला 322 करोड़ से बना 100 सीट का मेडिकल कॉलेज ढाई साल बाद भी अधूरा, निर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार का खामियाजा 500 मेडिकल छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। छात्र आज भी उधर के जिला अस्पताल के अस्थाई व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे हैं। शायद यही कारण है कि नेशनल मेडिकल कमिशन ने पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यह मेडिकल कॉलेज महेंद्रगढ़ चिरमिरी, कुनकुरी जसपुर, गीदम दंतेवाड़ा, कवर्धा, जांजगीर-चांपा में खोलने की घोषणा हुई थी।
प्रार्थना पत्र कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन के माध्यम से भेजे गए थे। नेशनल मेडिकल कमिशन संबंधी गाईडलाइन में त्रुटियां बताते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया। त्रुटि पूरी करने की तारीख 10 जून थी जो बीत गई। पांच मेडिकल कॉलेज खोलने का परमिशन नहीं मिलने पर मुंहकी खाई स्वास्थ्य मंत्री ने पर उनका बयान देखिए कहते हैं कांग्रेस को खुश होने की जरूरत नहीं है, यह केवल हमारी और अक्षमता वाली बात नहीं है। इसमें तीन मेडिकल कॉलेज कांग्रेस के समय वाले हैं। राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ जाती तो सबको खुशी होती ना बढ़ने पर खुश होने का कमेंट स्वास्थ्य मंत्री खीज को बताता है। इनमें से दो मेडिकल कॉलेज है तो ट्राईवल क्षेत्र में खुलने थे पर दो साल में एक ईंट भी नहीं जुड़ी 500 करोड़ का ओवररेटेड टेंडर बनाया पकड़े गए चुपचाप रद्द कर दिया। तो यह पूरा सिस्टम ही गड़बड़ है।
 मेडिकल कॉलेज का मंत्रियों से संबंध देखें महेंद्रगढ़ स्वास्थ्य मंत्री का क्षेत्र है, कवर्धा डिप्टी सीएम का क्षेत्र है, कुनकुरी तो सीएम साहब का क्षेत्र है, गीदम और जांजगीर भी काम व्हीआईपी नहीं है। ऐसे में डबल इंजन वाले सरकार की आलोचना तो होनी ही है। और सवाल सिर्फ डबल इंजन का नहीं है राज्य के 11 में से 10 सांसद भाजपा के हैं तब तो मामला और हास्यास्पद हो गया। सरकार कैसे चल रही है इसका एक उदाहरण बिलासपुर का हाई कोर्ट कई साल से कम कर रहा है पर आज तक उसे भवन के निर्माण ठेकेदार का अंतिम भुगतान नहीं हुआ। ठेकेदार को देश के सबसे बड़ी अदालत में जाना पड़ा जहां से राज्य सरकार को स्पष्ट कहा गया है कि समय सीमा में भुगतान कर दें अन्यथा अवमानना की कार्यवाही के लिए तैयार रहें। खाने का अर्थ है कि विकास का साय साय दावा करने वाले मुख्यमंत्री और उनके पूरे कैबिनेट का हाल ठीक नहीं है। और यह सब नकारात्मक खबरें सुशासन तिहार के समय आई है।