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मुद्राराक्षस के सामने चरित्र हो जाता है ढीला सेंट जेवियर से लेकर नारायणा तक नैतिक पतन का बेजान उदाहरण
Thursday, 11 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 12 जून 2026।
बिलासपुर जिले में शिक्षा का हाल चार्ट के ठेले पर बिकने वाली गटपट जैसा हो गया है। गटपट चाट उसे कहते हैं जिसमें दुकान में उपलब्ध सब सामान को थोड़ा-थोड़ा डाल दिया जाता है। रेस्टोरेंट की भाषा में इसे मिक्स वेज सब्जी कहते हैं। और यही हाल बिलासपुर जिले के निजी और सरकारी स्कूलों का है। 
दो उदाहरण हमारे सामने हैं तीन दशक से काम कर रहा सेंड जेवियर स्कूल सिटी सेंटर के नाम पर बच्चा पकड़ैया केंद्र खोल रहा है। जिले का सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी यह जानता है कि सेंट जेवियर के सरकंडा स्कूल को छोड़कर उसके किसी भी स्कूल को आईसीएसई कि मानता नहीं है। फिर से स्पष्ट समझ सेंट जेवियर का व्यापार विहार स्कूल और भरनी यह सीबीएसई है और सरकंडा स्कूल आईसीएसई है। और इसी के हम नाम बच्चा पकड़ैया केंद्र मोहल्ले मोहल्ले में खोल दिए गए हैं। सिरगिट्टी के वार्ड क्रमांक 10 और वार्ड 11 दोनों में एक एक स्कूल संचालित है। यह बात पक्की है कि एक ही शिक्षक से दो जगह नौकरी कराई जाएगी जो की नियम के विपरीत है। युवाओं को एक पुरानी कहानी बताई जाए जब पिक्चर की रिल आती थी और पिक्चर बहुत लोकप्रिय होती थी तो एक ही रिल से दो छविगृह में उसका प्रदर्शन होता था अंतर सिर्फ यह होता था कि दोनों के चलचित्र प्रसारण में 15 मिनट का अंतर होता था। अब यही हरकत क्रिकेट और शिक्षा जगत में हो रही है। 
सेंट जेवियर स्कूल सिरगिट्टी में चल रहे घपले को शिक्षा विभाग का संरक्षण है जब कभी भी सूचना के अधिकार के तहत इस संदर्भ में जानकारी मांगी जाती है तो सूचना अधिकारी बड़ी शालीनता से जवाब देते हैं कि गैर अनुदानित स्कूल के संदर्भ में जानकारी नहीं दी जा सकती पर गैर अनुदानित स्कूलों से समय-समय पर दिए जाने वाले कपड़े उपहार स्वरूप शिक्षा विभाग पहन सकता है। और जब स्कूल के कपड़े उतरेंगे तो शिक्षा विभाग के भी कपड़े उतर जाएंगे। ऐसे ही कपड़े पहने और उतरने का काम इन दोनों नारायणा टेक्नो में हो रहा है। एक कांड छुपता नहीं दूसरा काम उजागर हो जाता है। मान्यता संबंधी स्कैंडल पर उभय पक्षों ने धूरा डाल ही दी थी की कुछ ही दिन में डमी एडमिशन की गंदगी बाहर आ गई। 24 hnbc पिछले शैक्षणिक सत्र से डमी एडमिशन पर शिकायतें कर रहा है और उन शिकायतों की जांच का परिणाम था कि सरकंडा के एक सीबीएसई स्कूल पर 5 लाख का जुर्माना अभिरूपित हुआ। और रतनपुर के एक स्कूल की एक क्लास की मान्यता रद्द हुई। कक्षा 10वीं, 12वीं, 11वीं में डमी ऐडमिशन समझ में आता है पर कक्षा पांचवी के छात्रों का डमी ऐडमिशन कर दिया जाए या बात शिक्षा के घर घोर नैतिक पतन की ओर संकेत करता है इन स्कूलों के शिक्षाविदों से जब बात की जाती है तो उनके आदर्श और विचार बड़े उच्च होते हैं पर वास्तविकता में इनका चरित्र परचुन दुकानदार से भी गया बीता है। किराना व्यवसाई तो समान में मिलावट करता है पर यह शिक्षाविद छात्रों की जिंदगी में उसे दोगलेपन को बोलते हैं जिसके घुलने के बाद भारत देश की पीढ़ी की पीढ़ी बर्बाद हो रही है।