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24hnbc एन एच एम में 3 माह से नहीं मिला वेतन, सीएम साहब का स्वागत करता है स्वास्थ्य महकमा
Tuesday, 02 Jun 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 3 जून 2026। 
बिलासपुर जिला प्रशासन पूरी तैयारी में है प्रदेश के मुखिया सुशासन बिहार के नायक आदरणीय विष्णु देव साय जी का आगमन 4 जून को बिलासपुर में रहा है। एक मेडिकल उपकरण के लोकार्पण कार्यक्रम में वे जिला अस्पताल भी जाएंगे। सो जिला अस्पताल में तैयारी चल रही है। तैयारी को देखने जिला प्रशासन के आला अधिकारी जिला अस्पताल के कई चक्कर काट चुके हैं पर इस अस्पताल के मुख्य भवन के पीछे जो सो बिस्तर का मातृ शिशु अस्पताल है की एक लिफ्ट पर नजरे इनायत नहीं हुई वो आज भी बंद पड़ी है। बैंड लिफ्ट को छुपाने के लिए एक बोर्ड वहां रख दिया गया है। लिफ्ट बंद होना बहुत बड़ी समस्या नहीं है मरीज सीधी से रैंप से आना-जाना कर सकते हैं आखिर उन्हें अपनी देशभक्ति दिखाने का मौका तो मिलता है। पर जिन्हें छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधा देनी है इस अमले को 3 महीने से वेतन न मिल रहा हो तो इस डबल इंजन वाली गाड़ी का डीरेल होना कहते हैं। एन एच एम प्रोग्राम के स्टाफ को 3 महीने से वेतन नहीं मिला है। क्या प्रदेश के मुखिया को यह पता है ? क्या मुख्यमंत्री को या पता है कि जिस अस्पताल में वे खड़े होंगे उसका सीएस रोज अप डाउन करता है। मतलब सीएस का निवास बिलासपुर जिले में नहीं है। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवा सहित मानवीय प्रवृत्ति पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। 
जिस सिकल सेल्सस कार्यक्रम पर करोड़ों की धनराशि लगती है उस पीड़ित दीपिका को ट्विन सिटी दुर्ग के जिला अस्पताल में एक यूनिट ब्लड नहीं मिलता है और वह दम तोड़ देती है। चलिए वह तो ट्विन सिटी दुर्ग का मामला है जयपुर कुनकुरी के सखी केंद्र में दुष्कर्म से पीड़ित एक बोलने में असमर्थ बच्ची प्राण त्याग देती है कारण उसके प्राइवेट पार्ट में पीन मिलती है और पीन के इंफेक्शन से उसकी मृत्यु हो गई। नियम है सखी सेंटर में 5 दिन से अधिक नहीं रखा जा सकता है पर वह पीड़िता 15 दिनों से थी। और यह सब छत्तीसगढ़ में तब हो रहा है जब सुशासन तिहार मनाया जा रहा है। अर्थात प्रशासनिक अमला तिहार में इतना सो रहा है तो साधारण दोनों में तो चिर निद्रा में रहता होगा। हमने बनाया है हम ही सवारेंगे, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , महतारी वंदन सब कुछ तो जुमला है सत्य तो सत्ता है और सत्ता मिलने के बाद उसका सुख भोगना ही तो सुशासन है। बस अंतर यह है कि लोकतंत्र का वह आदर्श वाक्य जो कभी देश के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था कि लोकतंत्र लोकलाज से चलता है लाज तो लांज में बदल गई और सत्ता की आंखों का पानी तो कब का खत्म हो गया। अब बताओ लोक के पास मंदिर में बैठकर करने के लिए एक ही काम है सीताराम कहिए।