24hnbc व्यापार घाटे ने खोल दी मोदी अपील की पोल
Sunday, 31 May 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 1 जून 2026।
आम नागरिकों की 2 जून की रोटी उनके जेब को फाड़ रही है। तो दूसरी ओर सिर्फ एक महीने के युद्ध में भारतीय अर्थव्यवस्था के भुगतान संतुलन की हैसियत दिखा दी... डॉलर बचाने के लिए सरकारी हल्को में इतनी बेचैनी क्यों फैली है इसका राज भारतीय रिजर्व बैंक के वार्षिक रिपोर्ट में है।
2025-26 में भारत का भुगतान संतुलन 30.8 बिलियन डॉलर घाटे में रहा सरल भाषा में जो हम लिख रहे हैं उससे हमारा सारोंस समर्थक सिद्ध होना तय है। गुजरे वित्त वर्ष में भारत में जितना डॉलर आया उसे उससे 30.8 बिलियन डॉलर से अधिक डॉलर बाहर गया। ऐसा पूंजीगत खाता में बड़े दबाव के कारण हुआ। 2023 -24 में विदेशी निवेश, विदेशी ऋण, संपत्ति हस्तांतरण के जरिए 89.4 बिलियन डॉलर भारत आए थे। इस कारण चालू खाते से लगभग 27 मिलियन डॉलर घाटे के बावजूद भुगतान संतुलन 63.7 बिलियन डॉलर लाभ में था अब भुगतान संतुलन 30.8 बिलियन डॉलर घाटे में है। 24- 25 में पूंजीगत खाता में सिर्फ 16.6 बिलियन डॉलर का लाभ रहा । इस कारण भुगतान संतुलन तकरीबन 13 बिलीयन डॉलर माइनस चला गया। 25 -26 में पूंजीगत खाता में लाभ सिर्फ 7 करोड़ 20 लाख डॉलर का रहा चालू खाते में घटा बड़ा नतीजा संतुलन का घाटा बढ़ गया। साफ है कि दो वित्तीय वर्ष में भारत में डॉलर आने की दर में तेजी से गिरावट आई है। यह मामला केवल एक महीने के युद्ध का नहीं है। युद्ध नहीं भी होता तो इसी स्थिति पर आते हैं। 25 -26 में जितना विदेशी निवेश भारत में आया उसे 4.3 बिलियन डॉलर यहां से निकाल दिया गया। ट्रेड और भारतीय अर्थव्यवस्था घाटे में जा रही है। और आरएसएस 1 लीटर पानी में नहाया कैसे जाए पर ट्रेनिंग दे रहा है।