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24hnbc न्यायालय ने जयदीप के खिलाफ दर्ज कराई 1 और FIR
Tuesday, 26 May 2026 00:00 am
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बिलासपुर, 26 मई 2026।
छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के सचिव जयदीप रॉबिंसन के विरुद्ध न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाने को दिया एफआईआर दर्ज करने का आदेश। यह पूरा मामला शहर के प्राइम लोकेशन पर स्थित जमीन की धोखाधड़ी का है। मंदिर चौक स्थित नजूल जमीन प्लॉट 48/2 कुल क्षेत्रफल 10115 स्क्वायर फीट में से 1130 स्क्वायर फीट जमीन को जयदीप रॉबिंसन ने 23 /11/ 2017 को बेचा बदले में बयाना राशि 10 लाख रुपए प्राप्त किये। 26/ 12/ 2017 को ढाई लाख चेक से प्राप्त किया और फिर ₹60000 नगद प्राप्त किया। जयदीप रॉबिंसन ये राशियां यूसीएमएस यूनाइटेड क्रिश्चियन मिशन से प्राप्त मुख्तियारनामा के आधार पर ली। कोर्ट ने पाया कि जयदीप रॉबिंसन यूसीएमएस का अध्यक्ष ही नहीं था और उसके पक्ष में निष्पादित मुख्तियारनामा उसे यह अधिकार नहीं देता था कि वह भूमि का बिक्रय करें। पॉवर ऑफ़ अटाॅर्नी जमीन को लीज पर देने के लिए अधिकृत नहीं करती थी। 
अभी तक ने कई बार प्रयास किया कि इकरारनामा का पंजीयन हो जाए भूमि की रजिस्ट्री हो जाए पर जयदीप रॉबिंसन ने ऐसा नहीं किया। आवेदक अंत: कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने सिविल लाइन थाने को एक माह के भीतर एफआईआर दर्ज करके जांच प्रारंभ करने कहा है। जयदीप रॉबिंसन पिता एफ रॉबिंसन निवासी विद्यानगर, तहसील - जिला बिलासपुर, आर्थिक अपराध, फर्जी दस्तावेज, फर्जी पदनाम गढ़ने के आदतन आरोपी हैं। उनके खिलाफ राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाने में 420, 467, 468, आदि धाराओं की एक एफआईआर दर्ज है जिसमें उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत प्राप्त की है। जयदीप रॉबिंसन के खिलाफ बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में है शासकीय काम में बांधा की एक एफआईआर दर्ज है उनके विरुद्ध इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में भी शिकायत दर्ज है। तिल्दा थाना रायपुर में मारपीट की धाराओं में एफआईआर दर्ज है न्यायिक डंडाधिकारी बिलासपुर द्वारा बिलासपुर सिविल लाइन थाने को निर्देशित आदेश में एफआईआर दर्ज करने कहा गया है। आदेश पत्रिका को पढ़कर स्पष्ट नजर आता है कि रुपए की धोखाधड़ी, फर्जी पदनाम और फेक पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करने के कारण 3 से अधिक धाराएं तो लगना तो तय है।
छत्तीसगढ़ डायोसिस, छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के पदाधिकारी यूसीएमएस, यूसीएनआईटीए, सीएनआईटीए, सीडब्ल्यूबीएम, के लेटर हेड जिस तरह से विभिन्न सरकारी दफ्तरों में पेश करते हैं कोर्ट कई मामलों में लोकस न होने के कारण उन्हें सुनने से इनकार कर चुके हैं। और अब एफआईआर के आदेश इन कथित पदाधिकारियों को लंबे कानूनी झमेले में फंसा रहा है। जयदीप रॉबिंसन के खिलाफ एक और एफआईआर के आदेश हैं।