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24hnbc उपस्थिति की बाध्यता ने बंटाधार कर दिया शिक्षा का
Tuesday, 19 May 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 20 मई 2026।
हम मैकाले की लाख आलोचना करने ले पर वह शिक्षा व्यवस्था हमें सिखाती थी अब पूरी शिक्षा व्यवस्था कक्षा में उपस्थित पर केंद्रित हो गई है। सीखने का महत्व खत्म हो गया उपस्थित पर्याप्त है। वह चाहे कुछ ना सीखे यह साधारण भ्रष्टाचार नहीं है। इसने हमारी सीखने की क्षमता को खत्म कर दिया। Aser 2022 की रिपोर्ट बताती है कि पांचवी कक्षा के आधे से अधिक बच्चे पूरी कक्षा का पाठ भी नहीं और दो तिहाई बच्चे साधारण डिवीजन भी नहीं कर पाते। यह वह बच्चे हैं जिनकी उपस्थिति कक्षाओं में बहुत अच्छी थी पर सीखने के स्तर पर शून्य रहे यह शिक्षा में आपातकाल की स्थिति है। 
पहुंचे और शिक्षा एक नहीं है हमको यह बात पहले ही समझ लेनी थी। भारत में जो शिक्षा व्यवस्था खड़ी हुई है वह अंदर से खाली खोखा है। हमने पहले बताया कि बहुत से लोग शिक्षा से वंचित हैं। फिर उसका समाधान बताया मिड डे मिल्क, स्कूल बनाइये उपस्थिति सुनिश्चित करिए और भला अपने आप हो जाएगा। इस सोच ने असाधारण काम किया। 15 लाख स्कूल बने लगभग 25 करोड़ बच्चे नामांकित हुए। अधिकांश गांव में स्कूल पैदल दूरी पर है पर कक्षा में बैठा बच्चा स्वाभाविक रूप से सीख रहा है यह सोच गलत है। 2009 में pisa परीक्षक ने बता दिया कि भारतीय छात्र अन्य देश के छात्रों से बहुत पीछे हैं। तो हमने इस प्रशिक्षण में हिस्सा लेना बंद कर दिया। आखरी बार 174 देश में भारत 116 नंबर पर था। ग्रामीण भारत में शिक्षा का प्रमाण पत्र अक्सर कौशल का संकेत नहीं सरकारी नौकरी का प्रतीक बन जाता है। हमने एक और गलती की राइट टू एजुकेशन एक्ट में आठवीं तक किसी बच्चे को रोक नहीं जा सकता यह प्रावधान सीखने की न्यूनतम जवाब देही को खत्म कर रहा है। शिक्षक पर परिणाम का दबाव घट गया स्कूलों ने सीखना बंद कर दिया। पूरी शिक्षा व्यवस्था उपस्थित पर केंद्रित हो गई। विफलता का यह प्रभाव केवल शिक्षा तक नहीं अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित करेगा। एक पूरा आयु समूह बुनियादी समझ विश्लेषण और अनुकूलन क्षमता से वंचित हो जाएगा। यह पूरा वर्ग दिर्घ कालिक बोझ बन जाएगा। यह गलती हमारे पड़ोसी चिन ने नहीं की वहां सीखने के स्तर को सुधर गया। पर हमें उपस्थित महत्वपूर्ण लगी। क्योंकि हम सेवा आधारित मॉडल बना रहे हैं। हमें रटने की संस्कृति से बाहर आना पड़ेगा। समस्या की पहचान और उसका समाधान एक नहीं होता। पहले जवाब देही का विकेंद्रीकरण करना पड़ेगा। शिक्षक की प्रभावशीलता का मूल्यांकन स्थानीय स्तर पर करना पड़ेगा। और स्मृति से ज्यादा सोचने की क्षमता का विकास करना होगा। सोचने के बाद आएगा सीखने की क्षमता