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24hnbc छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन का हाल ही में हुआ चुनाव फिर पहुंचा उच्च न्यायालय
Wednesday, 01 Apr 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 2 अप्रैल 2026।
गौरतलब है की छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन का विवादित मामला माननीय उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है, शशि वाघे गुट की ओर से यह याचिका दायर किया गया है। पंजीयक द्वारा नितिन लॉरेंस की 2024 की समिति को निरस्त कर दिया गया था, जिस पर माननीय उच्च न्यालय ने शशि गुट को वैधानिक समिति माना व नितिन को कोई स्थगन नही दिया था मामला उपसचिव के यहा अपील की गई, जिन्होंने कलेक्टर को प्रसाशक नियुक्त करने का आदेश दिया। कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर तुलसी राठौर को प्रसाशक नियुक्त कर दिया। 
*प्रशासक ने अवैधानिक चुनाव कर निरस्त कमेटी को ही मनोनीत कर दिया* 
 शशि गुट ने बताया कि प्रशासक पारदर्शी नही थी, हमारे द्वारा बार-बार लिखित में बताया गया था कि बायलॉज के अनुसार भंग कमेटी चुनाव में प्रतिनिधित्व नही कर सकते, परन्तु प्रसाशक ने सिर्फ नितिन गुट को लाभ पहुचाने के लिए बायलॉज के नियमो का पालन न करके अवैध चुनाव कराया गया है, निर्वाचन के पूर्व अनियमितता की शिकायत लिखित में प्रसाशक , उपसचिव व पंजीयक को की गई थी, पंजीयक ने निर्वाचन पर स्थगन आदेश दिया था, परन्तु प्रसाशक ने नितिन गुट को जिताने के लिए कोई कसर नही रखी, यहा तक कि मतदाता सूची का प्रकाशन भी नही किया गया। चुनाव पूर्णतः अवैध व दूषित है
 जिसके विरुद्ध शशि गुट ने माननीय उच्च न्यालय में याचिका दायर की है। साथ ही शशि वाघे गुट ने अवैध चुनाव के विरुद्ध पंजीयक फर्म एवं संस्थाए के पास शिकायत कर धारा-27 दिए जाने पर रोक लगाने की आपत्ति दर्ज कर दी है। 
 
*इसी बीच में स्वयंभू पदाधिकारी बनकर नितिन, रुपिका व सुषमा ने सालेम स्कूल में बालात कब्जा किया।*
 चुनाव के बाद अवैध पदाधिकारी बनकर नितिन सुषमा व शाला की बर्खास्त प्राचार्य रुपिका ने सालेम स्कूल में ताला तोड़कर बालात कब्जा कर लिया है जबकि इन प्रतिनिधियों के खिलाफ पहले ही लगभग 07 एफआईआर दर्ज हैं, व ये सभी सशर्त जमानत पर है, इनके द्वारा से जमानत की शर्तों को तोड़ा गया है, जिसकी शिकायत कमिश्नर रायपुर व थाने में शिकायत दर्ज कर लिया गया है। असल मे सालेम स्कूल में कब्जा करने के पीछे कारण यह है कि इनके विरुद्ध पुलिस द्वारा अभी भी जांच किया जा रहा है अतः अपने अपराध के साक्ष्य को छुपाना चाहते है, जिसमे सुषमा कुमार के कंधे का बखूबी उपयोग किया जा रहा है। गौरतलब है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी अभी इनके विरुद्ध में एसएलपी दायर है फिर भी स्कूल में कब्जा साम दाम और दंड भेद का उपयोग कर ताला तोड़ा जा रहा है और उनके द्वारा से कहा जाता है कि शासन- प्रशासन हमारी मुट्ठी में है हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।