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मसीही समाज के कुछ पदाधिकारी मनोवैज्ञानिक रूप से हो गए हैं बीमार ग्रीन बुक संविधान पर भारी
Saturday, 07 Mar 2026 00:00 am
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बिलासपुर, 7 मार्च 2026। 
भारत के समकालीन इतिहास में मसीही समाज को प्रगतिशील, खुले विचारों वाला, वैज्ञानिक सोच, सेवा, समर्पण, त्याग के नैतिक मूल्यों से भरा जाना जाता है। ऐसे में वर्ष 2023, 24, 25, 26, में रायपुर के बड़ा गिरजाघर जिसे सेंड पाल महा गिरजाघर के नाम से जाना जाता है का मुखिया अपने ही समाज के 50 लोगों को यह कहते हुए समाज से निकाल दे कि उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था की दहलीज में जाकर धर्म विरोधी कार्य किया। 50 लोगों को समाज से निकलने की घटना बस्तर, जयपुर के सुदूर अंचल की बात नहीं है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सेंट पॉल महा गिरजाघर की है। यहां राज्यपाल, मानव अधिकार आयोग, 100 किलोमीटर पर राज्य का उच्च न्यायालय और जाने कितने संवैधानिक संस्थाएं हैं पर किसी ने अपंजीकृत डायोसिस के द्वारा भारतीय संविधान का सीधा अनादर पर संज्ञान नहीं लिया आश्चर्य की बात यह है कि अपंजीकृत संगठन के पदाधिकारी जब यह कहते हैं कि इन लोगों को तभी वापस लेंगे जब वे न्यायालयों में चल रहे मामलों को तुरंत वापस ले, अकंडीशनल।
अपंजीकृत संगठन के विभिन्न पदाधिकारी स्वयं विभिन्न मामलों को लेकर न्यायालय की शरण में गए और एक ने तो जेकमेन मेमोरियल अस्पताल बिलासपुर के संदर्भ में न्यायालय में चार याचिकाओं में अपना पद नाम बदला। और याचिका प्रस्तुत की लोकस के आधार पर उनकी याचिकाएं खारिज कर दी गई पर न केवल पद पर जमे हुए हैं समाज में भी हैं अथवा कोर्ट जाओगे तो समाज से बहिष्कृत कर देंगे। नियम से वे स्वयं ऊपर है। 
50 लोगों को समाज से बाहर कर दिया गया पर इतनी बड़ी खबर राज्य के अखबारों में स्थान न पा सकी। डायोसिस , सीएनआई के ग्रीन बुक क्या भारत के संविधान से ऊपर हैं। हमने हाल ही में यूपी की एक घटना में सनातन धर्म के शंकराचार्य को संविधान की सर्वोच्चता पर सहमति व्यक्त करते सुना, तो हम ऐसा मानते हैं कि अन्य धर्म गुरु भी देश के संविधान को सर्वोच्च मानते होंगे पर डायोसिस का प्रमुख इसे स्वीकार करता नहीं दिखाई देता है। समाज के विभिन्न वरिष्ठ जनों से चर्चा करने पर लगता है कि बगैर भेदभाव अवसर देने का गुण ईसाई समाज को अब नुकसान दे रहा है। चर्चा में वह बताते हैं की सेवा, त्याग, समर्पण का गुण के आधार पर उनके यहां कोई आगे बढ़ता है तो वह डायोसिस ही नहीं दिल्ली सिनौट मॉडरेटर के पद तक पहुंच सकता है। 
दो मामलों में या घटक हुआ है जबलपुर डायोसिस के एक पदाधिकारी पीसी सिंह का इतिहास वह बताते हैं वे मूलतः बिहार राज्य के भूमिहार परिवार था। किन्हीं कर्म से छत्तीसगढ़ भाटापारा स्टेशन से उसे वहां के पादरी ने पनाह दी और अपनाया परिणाम पीपी सिंह मसीह समाज का सबसे भ्रष्ट, कुटिल, धन लोलूप, पद लोलूप, जलसाज व्यक्ति निकला और उसके कारण पूरे भारत में समाज को अपूरणीय क्षति हुई ऐसा ही एक उदाहरण वर्तमान का है। बताया जाता है कि वर्तमान प्रमुख मूलतः महासमुंद क्षेत्र के हैं और घरों में केयरटेकर का काम किया करते थे। किसी सद्गुणी पादरी की शरण में आए और देखते-देखते सीढ़ी चढ़कर प्रमुख बन बैठे। इंफिनिटी कांप्लेक्स मनोविज्ञान का एक ऐसा शब्द है जो सुप्रिटी कांप्लेक्स के साथ जुड़ता है। जिम इंफिनिटी कंपलेक्स पाया जाता है वह बड़े पदों पर पहुंचने के बाद बड़ा नुकसान करते हैं।