एमएसएमई का रूप न ले ले सुपारी उद्योग बढ़ती बेरोजगारी के कारण बदलता है सुपारी का रेट
Tuesday, 24 Feb 2026 00:00 am
24 HNBC News
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बिलासपुर, 24 फरवरी 2026।
2025 की अंतिम तिमाही मस्तूरी हत्या का प्रयास का मामला और फरवरी अंतिम सप्ताह 2026 के बीच सुपारी उद्योग के रेट में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। इस धंधे पर निगाह रखने वाली एजेंसी के डाटा को तुलनात्मक रूप से देखें मस्तूरी का हत्या के प्रयास के मामले में एजेंसी के मुताबिक जिसकी हत्या के लिए सुपारी ली गई थी वह कांग्रेस का निर्वाचित जन प्रतिनिधि है। सुपारी देने वाला कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष थे, जिसने सुपारी ली वह भी कांग्रेस का नेता था। कल सुपारी उद्योग 2 लाख का 2026 की फरवरी में अब यही सुपारी उद्योग में पात्र बदलते हैं जिसकी हत्या की जानी है भाजपा का जो चाहता है हत्या कर दी जाए भाजपा के हैं इस बार भरोसा प्रोफेशनल पर दिखाया गया एजेंसी के अनुसार सुपारी की ये यूनिट 25 लाख की लगी तो मस्तूरी की सुपारी यूनिट की लागत 2 लाख और बिलासपुर सुपारी की यूनिट लागत 25 लाख लगता है।
जिले में एमएसएमई का विस्तार हो रहा है बढ़ती हुई बेरोजगारी इसका एक कारण हो सकती है। इस उद्योग अपॉइंटमेंट के अच्छे चांस है। पापुलैरिटी भी मिलती है। जो भविष्य में धंधे की ग्रोथ बन जाती है पर ये दोनों यूनिट सफल नहीं रही, क्योंकि हत्या के स्थान पर वे कोशिश में बदल गई। कहां जा सकता है की सुपारी के यूनिट में सुधार की व्यापक गुंजाइश है और इससे जुड़ा एक अन्य एमएसएमई डेवलप हो सकता है। जिसमें कोई नया गलगोटिया इन्वेस्टमेंट कर सकता है यदि मानव श्रम पर संदेह है तो कृत्रिम बुद्धि में भी शोध परख व्यय किए जा सकते हैं। वे सुपारी दाता ध्यान दें चीन से इस संबंध में कुत्ता खरीदा जा सकता है।
यूनिट की लागत के कारण एजेंसी की थ्योरी बिगड़ जाती है कुछ का कहना है कि नजराना शुकराना के कारण थ्योरी में बदलाव हो सकता है कुछ कहते हैं कि यूनिट लगाने के पहले एजेंसी का काला के सर्विस चार्ज भी जोड़ लिए जाना चाहिए। एमएसएमई की सफलता के चांस बढ़ जाते हैं। आज राज्य का बजट है सुपारी उद्योग की व्यापक संभावना को देखते हुए जरूरतमंदों ने मांग की है कि फाइनेंस आसान शर्तों पर कराया जाए यदि सुपारी यूनिट को बीमा कवच भी मिल जाए तो इसकी ग्रोथ जल्दी होगी। सरकार भी जीएसटी की लालच में ऐसा कर सकती है।
("हमारे इस राईटप को व्यंग मानकर पढ़ें" पर यह सुपारी उद्योग छत्तीसगढ़ की सच्चाई)।