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24hnbc जिले में कांग्रेस के सामने फीका है, भाजपा का वार्ता प्रबंधन
Tuesday, 15 Dec 2020 18:00 pm
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के 2 वर्ष ऐसे समय पर पूरे हो रहे हैं जब केंद्र सरकार के किसान विरोधी कानून के कारण देशभर में किसान आंदोलन चल रहा है। केंद्र की भाजपा सरकार ने इस आंदोलन पर अपना पक्ष मजबूत करने के लिए सफाई कार्यक्रम के तहत पत्रकार वार्ताओं का आयोजन किया। कुछ इसी तरह की पत्रकार वार्ताएं सीएए नागरिकता संबंधी कानून के विरोध में चल रहे आंदोलन को ध्वस्त करने के लिए भी भाजपा ने की थी, तब बिलासपुर में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पत्रकार वार्ता की थी इस बार इस स्तर पर सफाई देने का काम नारायण चंदेल ने किया, इसी से समझ आता है कि किसान आंदोलन पर केंद्र सरकार की सफाई का निर्देश प्रदेश भाजपा ने इतनी गंभीरता से लिया। रायपुर में यही सफाई बृजमोहन अग्रवाल ने दी इन पत्रकार वार्ताओं की दूसरे दिन ही बिलासपुर में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे ने पत्रकार वार्ता की उनके पास कृषि विभाग भी है, यह बात समझ नहीं आई कि 2 साल की उपलब्धि गिनाना था तो प्रभारी मंत्री क्यों नहीं आए और यदि किसान आंदोलन पर बात होनी थी तब कृषि मंत्री का आना समझ आता है किंतु मामला राज्य सरकार के 2 साल के कार्यकाल का था उपलब्धि बताने प्रभारी मंत्री होता तो बेहतर होता इसके बावजूद हाथ लगे मौके को बिलासपुर की मीडिया ने खो दिया ऐसे बहुत से सवाल थे जिन पर कांग्रेस की सरकार को घेरा जा सकता था। पर आपाधापी में गंभीर प्रश्न पीछे रह गए और बिना मतलब की कवायद पर चर्चा हुई प्रदेश सरकार ने सबसे महत्वपूर्ण योजना गौठन, गोधन न्याय योजना पर वक्तव्य दिया । जिले में 80 के लगभग गौठान हैं समय-समय पर आदर्श गोदान की चर्चा होती है। सरकार का एक बड़ा बजट इस योजना पर लगा है और जिले के वरिष्ठ अधिकारी इस योजना की सतत मॉनिटरिंग करते हैं उसके बावजूद कुछ गौठान अच्छा कार्य कर रहे हैं और कुछ औसत से भी नीचे हैं इसका एक ही अर्थ है कि नौकरशाही मुख्यमंत्री की योजना को गंभीरता से नहीं ले रहा है इसका परिणाम तो पार्टी को ही भुगतना होगा दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की सफाई पत्रकार वार्ता में गंभीरता कितनी थी की उपस्थित पत्रकार संख्या में तो बहुत है किंतु दूसरे दिन अखबारों में सोशल मीडिया पर नारायण चंदेल की बातें नजर नहीं आई ऐसा क्यों हुआ यह तो भाजपा के कर्ता-धर्ता को देखना चाहिए पूर्व में भाजपा का संवाद कार्यालय सत्ता में रहने के कारण सब कुछ सहायता से हो जाएगा का आदी हो चुका है वह समझ ही नहीं पाते कि वह अब विपक्ष में है केंद्र में शासन का अर्थ दिल्ली ही होता है प्रदेश सरकार जिसकी होगी जनसंपर्क को उसका होगा पार्टी का संवाद कार्यालय कम से कम बिलासपुर में लचर है ऐसे में नेताओं की बात जनता तक कैसे पहुंचेगी पत्रकार वार्ताओं के माध्यम से एक पार्टी किसान आंदोलन को ध्वस्त करने में लगी है और दूसरी पार्टी 2 साल की उपलब्धि को किसान आधारित बताकर अपनी नीति को केंद्र की नीति पर भारी बता रही है प्रदेश के मंत्री रविंद्र चौबे ने स्पष्ट कहा कि हम गोबर खरीद कर जो लाभ ग्रामीण स्तर पर दे रहे हैं उससे ना केवल गोबर लाने वाले को सीधा पैसा मिलता है बल्कि गोबर की खरीदी से पूरा वातावरण सकारात्मक लाभ पा रहा है जबकि प्रधानमंत्री की 500 की राहत राशि साल में दो किस्तों में मिलती है और इससे तो रोज एक कप चाय का जुगाड़ भी नहीं होता।