भाजपा की अजब गजब नीति सवर्ण को छोड़ अवरण को धापे सवर्ण न छूट जावे
Thursday, 29 Jan 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 30 जनवरी 2026।
पहले शंकराचार्य विवाद फिर यूजीसी के नियम और करीब 3 साल तक आधा दर्जन से ज्यादा पिछली जाति के नेताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की चर्चा के बाद भाजपा में अगड़ी जाति कायस्थ के नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना क्या यह सब सहयोग है। भाजपा के नेता शिक्षा नीति, विदेश नीति, अर्थनीति को भले न समझे पर राजनीति को खूब समझते हैं और अनुभव कहता है कि भाजपा की यह नई नीति है। संयोग नहीं दर्जनों कथा वाचक अनाप-शनाप बयान बाजी करके हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण करके माहौल को तनावपूर्ण बनाते हैं पर यह सब सरकार की हां में हां मिलते हैं। ऐसे में एक शंकराचार्य स्वामी अभीमुक्तेश्वरा नंद ही तो थे जो सच को कहने की हिम्मत करते हैं और उनके मान को जिस तरह से धक्का पहुंचाया गया साफ समझ में आया कि आध्यात्मिक शंकराचार्य के पद की प्रतिष्ठा को समाप्त किया जा रहा है और कथित साधु संत जो हिंदू मुस्लिम नॉरेटिव को बढ़ाते हैं का महिमा मंडन किया जा रहा है।
राजनीति में कुछ भी अनायास नहीं होता तो अभी भी जो कुछ हो रहा है उसकी योजना ही ऐसी बनी है कि यह अनप्लान लगे पर यह है सब कुछ प्लांट यूजीसी की ड्राफ्टिंग 2026 का मूल 2012 का नियम है। जिसे थोड़े से संशोधन के साथ फिर से लाया गया है। एससी-एसटी उत्पीड़न कानून के 80 - 90 फ़ीसदी मामलों में आरोपी पिछड़ी जातियों के हैं। शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के भी एससी-एसटी के उत्पीड़न वर्ग में शामिल किया जा रहा है। क्या इससे तीनों समूह के बीच समरसता स्थापित हो जाएगी पर इन तीनों वर्गों का सामान्य वर्ग के संबंधों में तनाव ज़रूर बढेगा। सवर्ण मतदाता के पास भाजपा के अलावा कोई चारा नहीं होगा और नए तरीके से बीजेपी जितनी आबादी उतना हक के नारे का तोड़ ढूंढ रही है पर राजनीति में नेट कभी-कभी यह गलती करते हैं वह अपना मूल छोड़कर दूसरे का वोट हथियाना की कोशिश करते हैं और ऐसे में मूल भी गवा बैठते हैं।