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24hnbc सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को न मानने वाले थाने क्यूआर कोड की क्यों करें चिंता
Saturday, 24 Jan 2026 18:00 pm
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बिलासपुर, 25 जनवरी 2026। 
राज्य के पुलिस महकमें पर दाग अच्छे हैं यह तो नहीं कहा जा सकता। हाल ही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दो ऐसे निर्णय दिए जीने से यह पता चलता है कि पुलिस महकमें में आदर्श के बाद तो बहुत दूर डीके वासु विरुद्ध वेस्ट बंगाल प्रकरण के बाद सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए दिशा निर्देश का भी पालन नहीं होता। उच्च न्यायालय के एक निर्णय में याचिकाकर्ता को अनधिकृत तरीके से हिरासत में लेकर उसका जुलूस निकालना और नारे लगवाने पर संबंधित थाने के स्टाफ की जांच का आदेश हुए। यह सिंगल बेंच का आर्डर है। 
दूसरे मामले में डीबी ने होटल संचालक को अवैध हिरासत में रखने के खिलाफ पेश याचिका में पीड़ित को ₹100000 भुगतान का आदेश दिया। इन दो आदेशों के परिपेक्ष में छत्तीसगढ़ पुलिस ही अपने ही कर्मचारियों के मामले में चयनात्मक कार्यवाही बताती है कि यहां बहुत कुछ गड़बड़ है। 
बिलासपुर जिले में पदस्थ रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेंद्र प्रसाद जायसवाल और दूसरा महिला डीएसपी कल्पना वर्मा के मामले को देखें। राजेंद्र जायसवाल पर स्पा संचालक ने लेनदेन का आरोप लगाया वीडियो वायरल होने के बाद डिप्टी सीएम, होम मिनिस्टर का बयान आया और श्री जायसवाल नप गए। निलंबन की सजा तो मिला ही गई दूसरी और डीएसपी कल्पना वर्मा एक कारोबारी दीपक टंडन ने कई आरोप लगाए 2 करोड़ की नगद, 50 लाख का डायमंड रिंग, लग्जरी कार जांच हुई पर कल्पना जी को निलंबन का दंड नहीं मिला। रिपोर्ट तो यहां तक कह रही है कि संवेदनशील सूचनाओं भी लीक हुई रायपुर आईजी ने 1400 पेज की रिपोर्ट पीएचक्यू को दी है दोनों मामलों में अभी आप ही है जब तक जांच रिपोर्ट नहीं है तो दो अलग-अलग अधिकारियों पर कार्यवाही में भेदभाव क्यों..... पर उच्च न्यायालय के दो आदेशों ने छत्तीसगढ़ पुलिस को आईना तो दिखाए। इतना ही नहीं रायपुर के आईवीएफ पहला जानी केंद्र से न्याय पाने के लिए एक माता-पिता को उच्चतम न्यायालय तक जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहला जानी केंद्र के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई ऐसे में बिलासपुर के नव सदस्य आईजी का कहना थाने में क्यूआर कोड देंगे जिन थानों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धत्ता बता दिया जाता है। क्यूआर कोड की बिसात ही क्या है। यह लेख इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह सब घटनाक्रम गणतंत्र दिवस के पूर्व का है।