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24hnbc कोई न करे आत्महत्या, नहीं मिलेगा न्याय
Wednesday, 14 Jan 2026 00:00 am
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बिलासपुर, 14 जनवरी 2026।
नैतिक, धार्मिक , कानूनी किसी भी पहलू से देखें आत्महत्या अनुकरणीय उचित नहीं कहीं जा सकती पर हमारा विषय उस पहलू पर चर्चा करना नहीं है। हम यह कह रहे हैं कि बिलासपुर जिले में एक से अधिक उदाहरण इस बात के हैं कि जिन्होंने भी आत्महत्या की, सुसाइड नोट लिखें या फेसबुक पर लाइव होकर कुछ कहा किसी भी मामले में पुलिस की जांच निष्पक्ष और वैसे व नहीं कहीं जा सकती।
पहला मामला हाल ही का है गणेश साहू इस आत्महत्या प्रकरण में लिखाई गई एफआईआर स्वयं ही संदेह के घेरे में हैं। किसी अन्य वजह से अल्पसंख्यक समुदाय के एंगल को ठोका गया। निपटो या निपटादो के ही समीकरण से सरकंडा थाने में सेकंड एपिसोड एफआईआर बलात्कार भी बना है। तो यह कहानी तो अभी चल रही है। इसके पूर्व सकरी थाना क्षेत्र में कुम्हारपारा निवासी पेसे से ड्राइवर जो अकबर खान नाम के एक व्यक्ति का ड्राइवर था ने अपनी बुआ के घर जाकर आत्महत्या की आत्महत्या करने वाले के पिता आज भी दोषियों के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। जिसका भी नाम आया वह बड़ी अदालतों में जाकर कानूनी दांव-पेंच लगाकर बच रहे हैं। शनिचरी रप्टा के पास एक अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिक ने आत्महत्या की जमीनी विवाद था। जिन दो लोगों पर पीड़ित ने आरोप लगाए थे बहुत दिनों तक अपनी पकड़ के आधार पर बचे रहे प्रकरण बेहद कमजोर हो गया यह मामला कोतवाली थाने का है। साईं बाबा श्रीकांत वर्मा मार्ग में रहने वाली मध्यम वर्ग परिवार की महिला जिसका पति रेलवे में अच्छे खासे वेतन वाले पद पर कार्यरत था फेसबुक लाइव होकर दोषियों का नाम बताते हुए अपनी जीवन डगर छोड़ दी पर शुरुआती सक्रियता के बाद जांच कहां गायब हुई किसी को दोषी नहीं पाया गया पिछले एक दशक में आत्महत्या प्रकरणों को अगर लिखने बैठे तो जांच एजेंसी के पेशेवर ईमानदारी पर थीसिस लिखी जा सकती है। इससे ज्यादा कहना उचित नहीं होगा।