
बिलासपुर ---:छत्तीसगढ़ प्रदेश में कांग्रेस सरकार का दो साल पूरा हो चुका है.दो साल पूर्व 15 वर्षो तक भाजपा का शासन रहा.किसी भी राजनितिक दल को मजबूत और उचाई तक पहुँचाने में उस दल के कार्यकर्ताओ का अहम भूमिका होता है कार्यकर्ताओ के बल पर ही पुरे मुहीम का संचार बड़ी आसानी और तीर्व गति से आम लोगो तक पहुँच जाती है जिससे जनता के बिच किसी भी राजनितिक दल के प्रति अपना विचार बनाने में आसानी होती है या यु कहे की एक राजनितिक दल को समर्थन देना है या नही कार्यकर्ताओं के महत्त्व पर निर्भर करता है.आज हम बात कर रहे है कांग्रेस के कार्यकर्ताओ का जिन्होंने 15 वर्षो तक विपक्ष में रहने के बाद अपनी लड़ाई जारी रखी.भाजपा शासन में कांग्रेस कार्यकर्ताओ को अपमान और जिल्लत उठानी पड़ी जिसके कई उदाहरण काल के गरब में छुपी हुई है घड़ी चौक के अनावरण स्थल पर कांग्रेसियों को आमंत्रित करने के बाद तत्कालीन राजस्व मंत्री के इशारे पर पुलिश बल ने एक एक कार्यकर्ताओ को कार्यक्रम स्थल से उठाके बाहर फेक दिया तो वही कांग्रेस भवन में घुसकर पुलिश ने लाठियां तक भांजी बर्बरता का यह उदहारण न सिर्फ बिलासपुर बल्कि पुरे प्रदेश में देखने को मिलती रही जो सिद्ध करता है की कांग्रेसी कार्यकर्ताओ ने विपक्ष में रहकर खूब सहा लेकिन झुके नही और आगें बढ़ते रहे है जिसका फलस्वरूप 2018 में कांग्रेस को सत्ता हासिल हुआ किन्तु इतने संघर्ष और महनत के बाद भी क्या कांग्रेस की सरकार अपने उन कार्यकर्ताओ को महत्व दे पा रही है जिसके वे हकदार है..?जब भी कोई नेता मंत्री का काफिला आता है .कार्यकर्ताओ का भीड़ बढ़ना स्वभाविक है और इसी भीड़ का फायदा कुछ ऐसे मतलबी किस्म के लोग उठाते है जो अपने आपको सबसे आगें दिखाते है और असल कार्यकर्ता पीछे रह जाते है ऐसे नकली कार्यकर्ताओ को जानना जरुरी है और कांग्रेस के निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपने दल के समर्पित कार्यकर्ताओ को पहचानना भी जरुरी है जो हर हाल में उनके साथ खड़े रहते है ऐसा ही एक घटना विगद दिनों सामने आया है बिलासपुर नगर विधायक बिलासपुर तहसीलदार एवं एसडीएम कार्यालय का दौरा किए और लगातार राजस्व मामलो की पेंडेंसी की समीक्षा की इसी दौरान कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ता भी अपने नेता के साथ हो चले जिसमे मुख्य रूप से फिरोज खान अपने दल बल के साथ भी उपस्थित थे विधायक की आगवानी कर रहे कार्यकरताओ के बिच एक कार्यकर्ता ऐसा भी था जिसका नाम मोती गंगवानी है वो विधायक के साथ चलने केलिए फिरोज खान को ढकेलते हुए निकल गया और इसी बात पर दोनों के बिच कहा सुनी सुरु हो गई जो धक्कामुक्की में तब्दील हो गई.हमने जब इस घटना का परिक्षण किया तो पता चला की मोती गंगवानी कोई कांग्रेस का कार्यकर्ता नही है इस बात को हमने बिलासपुर के एक वरिष्ट कांग्रेसी कार्यकर्ता से चर्चा किया और उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर यह स्पष्ट किया की बीते 10 वर्ष में उनको नही मालुम की कोई कांग्रेसी कार्यकर्ता इस नाम से है और साथ में फिरोज खान के पार्टी के प्रति समर्पित भावना का भी जिक्र किया.विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व एनएसयुआई अध्यक्ष फिरोज खान ने इस घटना पर अपना पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा की कार्यकर्ता को कुछ नही चाहिए सिवाय मान सम्मान और पहचान कि जिसके लिए वो हमेसा संघर्षरत रहता है कांग्रेस सत्ता में है उनको अपने कार्यकर्ताओ को पहचानना चाहिए और उनको पहचान दिलाना चाहिए .