24 HNBC News
24hnbc 1 साल में ईसाई धर्म की हर वैल्यू शून्य, बिशप कितनी उत्तरदाई
Friday, 19 Dec 2025 18:00 pm
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
बिलासपुर, 20 दिसंबर 2025।
4 जुलाई 2024 के दिन छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत कोई नई बिशप मिली थी। मात्र 1 साल की छोटी सी अवधि में उन्होंने वह कर दिखाया जो उनके पहले का कोई बिशप नहीं कर पाया, न भविष्य का कोई कर पाएगा। भूतों ना भविष्यति मैडम सुषमा के रिकॉर्ड को कोई चैलेंज नहीं दिया जा सकेगा। ईसाई धर्म को मानने वालों के लिए क्रिसमस नया साल सबसे बड़ा पर्व है। पर 2025 का क्रिसमस यदि छत्तीसगढ़ में फ़ैल हजारों चर्च के पादरी, 19 स्कूलों के प्राचार्य सोच उन्हें क्या मिला। 1 साल में क्या हुआ तो उनकी आत्मा कांप जाएगी। 2 से 3 सदी की परंपरा, समर्पण, प्रेम, परोपकार से सींची गई बगिया का हर प्रतीक ध्वस्त हो गया। ये वे प्रतीक और चिन्ह रहे जिन पर केवल ईसाई नहीं हर सहीषूर्ण नागरिक को गर्व था। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सीएनपी बरार के इतिहास में ये जिंदा प्रतीक दर्ज थे। 
ग्रास मेमोरियल रायपुर, जेकमेन मेमोरियल अस्पताल बिलासपुर का अपना एक जीवंत इतिहास और आज का इतिहास अपनी दशा पर स्वयं रो रहा है। इन स्थानों की स्थिति देखकर युद्ध ग्रस्त यूक्रेन और फिलिस्तीन याद आ जाता है। पर छत्तीसगढ़ डायोसिस के पदाधिकारी को लज्जा शायद ही आती हो, पद झूठी प्रतिष्ठा और बाइबल के वचनों का पालन न करके एक साल में ही पूरी परंपरा इतिहास ध्वस्त हो गया और इतने के बाद भी पदाधिकारी अपने झूठे घमंड में मस्त हैं। 
पूरे छत्तीसगढ़ में कहीं ना कहीं रोज धर्म प्रचार जो भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में प्रदस्त है को धर्मांतरण का आरोप लगाकर एफआईआर कर दी जाती है और डायोसिस का कोई पदाधिकारी विरोध नहीं करता मानो जांच एजेंसी जो कह रही है वही सत्य है। बिलासपुर जेकमेन मेमोरियल अस्पताल परिसर के भीतर एक कलीसिया विश्वासी मंदिर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सरकार ने इस पूरे परिसर को अपने कब्जे में लिया बेहद मजबूत बिल्डिंग को जमींदोज कर दिया । उच्चतम न्यायालय से को स्टेटस के बाद भी किसी प्रचारक की हिम्मत नहीं हुई की विश्वासी मंदिर में प्रेयर हो सके नहीं तो इसी विश्वासी मंदिर में सैकड़ो अवस्थावान रोज प्रेयर के लिए एकत्र होते थे। क्या कोई आस्थावान और उनके नेतृत्व इतनी निर्लज्यता से पलायन कर जाता है जितनी सहजता से डायोसिस के पदाधिकारी चलते बने। 
छत्तीसगढ़ का इसी वर्ष का उदाहरण है केरल की दो नन गिरफ्तार हुई तो दर्जनों सांसद केरल से छत्तीसगढ़ भागे चले आए पर आज तक विधानसभा छत्तीसगढ़ या लोकसभा और राज्यसभा में कभी भी किसी भी विधायक सांसद ने जेकमेन मेमोरियल, ग्रॉस मेमोरियल रायपुर और छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के मसले को कभी नहीं उठाया। छत्तीसगढ़ में ईसाई धर्म को मानने वाले लाखों की संख्या में हैं। और लाखों ही मतदाता हैं तब दबाव क्यों नहीं बनता क्या डायोसिस के पदाधिकारी गुटिय झगड़ों में इस बुरी तरह उलझ चुके हैं कि उनका प्रभाव राजनीतिक रूप से शून्य हो गया है या यह पदाधिकारी किसी अन्य संघ के रबर स्टैंप हैं।