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24hnbc बात निकली तो दूर तलक जाएगी " प्रेस क्लब बिलासपुर "
Tuesday, 09 Dec 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 10 दिसंबर 2025।
""बिलासपुर प्रेस क्लब"" समिति के रूप में पंजीकृत संस्था है और यह पंजीयन जब भी हुआ हो निश्चित ही इस शहर के गणमान्य पत्रकारों ने कराया होगा। हम उनके नाम इसलिए नहीं ले रहे हैं कि उनकी मानसिकता नियत और नीति में कोई खोट नहीं थी। सर्व सहमति से अपने ही बीच से एक को अपना अध्यक्ष मान लिया जाता था और वह परंपरा काफी दिन तक चली। कुछ लोगों को इस समाचार और विश्लेषण से बुरा लग सकता है पर अब जब कई पूर्व अध्यक्ष ही संस्था को दफन करने तैयार है तो वास्तविक तथ्य जो छुपाए जा रहे हैं वह बाहर आने ही चाहिए।
संस्था पंजीकृत होने के 10 साल बाद ही गद्दी की गुलाम हो गई, यह गद्दी किसकी थी सब जानते हैं। अधिकतर मेको पर अध्यक्ष वही चुना गया जिसे गद्दी ने चाहा... आखिर गद्दी को प्रेस क्लब और ट्रस्ट की इतनी जरूरत क्यों थी। क्लब को समिति के रूप में पंजीयन होने के कारण नियम अनुसार धारा 27, धारा 28 जमा करनी चाहिए और जमा करने के उपरांत निर्वाचित पदाधिकारी की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करनी चाहिए पर समिति की रिकॉर्ड देखने से पता चलता है कि कई साल तक धारा 27, 28 की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और मीडिया की समिति है करके उप पंजीयक बिलासपुर में समिति के ऊपर नियमानुसार जुर्माना नहीं लगाया।
कई साल तक केवल अध्यक्ष का निर्वाचन होता रहा और अध्यक्ष अपने अनुसार अन्य पदाधिकारी चुने लेता था। यह निर्वाचन प्रक्रिया ही गैर लोकतांत्रिक थी। जब टीम के अन्य पदाधिकारी अध्यक्ष के रहमों करम पर होंगे तो वह सदस्यों के प्रति उत्तरदाई कैसे होंगे। बाद में जब निर्वाचन कार्यक्रम के दौरान बार-बार निर्वाचन प्रक्रिया का पालन करने के आवेदन आए तब सब पद पर चुनाव कार्यक्रम घोषित हुए पर निर्वाचन अधिकारी गद्दी से ही तय होता था। प्रेस क्लब में वित्तीय अनियमितता आम बात है पर पहला बड़ा आप सांसद कमला मनहर की मध्य से खरीदी गई टाटा सफारी का विवाद है। जब अत्यधिक आलोचना हुई तो उसे समय के अध्यक्ष और टीम ने उसे टाटा सफारी को वापस कलेक्टर को दे दिया और कलेक्टर ने टाटा सफारी जो की एंबुलेंस के नाम पर दर्ज थी को स्वास्थ्य विभाग को दे दिया और उसे कथित एंबुलेंस टाटा सफारी का उपयोग मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी ने खूब किया। यहीं से समिति में मुद्राराक्षस का प्रवेश हुआ और दबदबा रखने वाले पदाधिकारीयों ने साम, दाम, दंड, भेद, अफवाह निम्न स्तरीय चुनाव प्रचार का शुरुआत हुआ। आज एक पूर्व अध्यक्ष प्रेस क्लब को सत्ता रूढ़ पार्टी की गोद में बैठा बता रहा है। ऐसा आरोप नए नहीं हैं। चुनाव के हार जीत के समीकरण को देखते हुए ये आरोप पूर्व में भी लगते थे।
छत्तीसगढ़ में 15 साल तक एक ही राजनीतिक दल का शासन था और उसके मुखिया विजन 20 के नाम से एक कार्यक्रम खूब चलाएं बिलासपुर प्रेस क्लब के एक पदाधिकारी ने इस विजन 20 का रस खूब पिया खाने का अर्थ पदाधिकारी इस के पास कटोरा लेकर जाएगा जहां से उसे कुछ मिलने की संभावना हो। इस समिति में दर्जनों बार सांसद और विधायक निधि का पैसा आया पर पारदर्शिता कभी नहीं रही लाइब्रेरी, कंप्यूटर, वाई-फाई की सुविधाओं के लिए सीएसआर मद से लाखों रुपए आए पर सदस्यों को हिसाब नहीं बताएं गये चुनाव के कुछ दिन पूर्व होने वाली एजीएम औपचारिकता मात्र रही सदस्य अपने-अपने ईमान से पूछे कि उन्होंने अपनी तरफ से कितनी बार सदस्यता शुल्क दिया और रसीद प्राप्त की । क्या बल्क में रसीद कट जाना उचित कहा जा सकता है। जब सदस्य से ₹50 प्रतिवर्ष सदस्यता शुल्क न देकर चुनाव लड़ रहे पदाधिकारी से स्वीकार करते हैं उसी दिन वे अपने पूछने के अधिकार से वंचित हो जाते हैं। जब चुनाव जीतने के लिए सदस्यता के नियमों को ढीला नहीं खत्म ही कर दिया जाएगा तो जीत कर आना पत्रकार कैसे तय करेगा।
इस बार चुनाव की अनियमितता की शिकायत के बाद रजिस्टर ने जो आदेश दिया है वह सामान्य है। निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति कलेक्टर बिलासपुर करेंगे और चुनाव उन्हीं के बीच होगा जिनके बीच हुआ था। असल बात समिति में वित्तीय अनियमितता की जांच धारा 28 की अवहेलना बगैर जुर्माना रोपित हुए लेखा की स्वीकृति का उत्तरदाई कौन खोजेगा प्रेस क्लब साधारण समिति होती तो इसका पंजीयन रद्द हो चुका होता स्वयं को लोकतंत्र का चौथा पिलर कहने के पूर्व एक बार अपने गिरेबा में झांके उसके बाद खूब आरोप प्रत्यारोप लगाए। प्रेस क्लब की दुर्गंध के तले जो गृह निर्माण सहकारी समिति बनी उससे भी यही बदबू निकलती है।