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24hnbc न्याय सबके लिए नहीं है
Sunday, 07 Dec 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 8 दिसंबर 2025।
यह एक ऐसा सत्य है जिसे शर्म के साथ सर झुकाकर स्वीकार करना ही होगा। कांकेर जिले के सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष जीवन ठाकुर की मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में रायपुर सेंट्रल जेल में 4 दिसंबर को हो गई। 12 अक्टूबर को उन्हें गिरफ्तार किया गया था और कांकेर जेल में रखा गया था। 2 दिसंबर को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था। मामला फर्जी वन पट्टा बनाने की शिकायत का था शिकायत सही पाई गई थी और तहसीलदार सत्यम शुक्ला ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
फर्जी वन पट्टा बहुत बड़ा मामला नहीं है अगर जमीन का पट्टा अवैध था तो उसे रद्द करने के लिए प्रक्रिया है। एफआईआर दर्ज करने की क्या जरूरत और एफआईआर दर्ज करने के पहले वन अधिकार अधिनियम को देखा जाना चाहिए। फर्जी वन पट्टे पर एफआईआर हुई जीवन ठाकुर को गिरफ्तार किया गया जमानत नहीं मिली वो जेल चले गए और मौत प्राप्त हुई।
तुलना करें रायपुर सिविल लाइन थाने में छत्तीसगढ़ डायोसिस अपंजीकृत के पदाधिकारी नितिन लॉरेंस और उनके कई सहयोगियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 आदि जैसे संज्ञेय धाराओं में एफआईआर दर्ज है। व्यवस्था ने पूरा मौका दिया अग्रिम जमानत प्राप्त करने का यह सभी छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के फर्जी पदाधिकारी बनकर काम कर रहे थे। लोगों को नौकरी से निकाल देते है, तनख्वाह नहीं देते थे, पीएफ जमा नहीं करते थे यहां तक की एक स्कूल में फर्जी टीसी तक भी देते थे इतना ही नहीं फर्जी पदाधिकारी बनाकर एक लोक सेवक को धोखा दिया और अन्य के खिलाफ एफआईआर कराई।
हाल ही में रजिस्टर का आदेश छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ़ एजूकेशन के युक्त पदाधिकारी वैधानिक नहीं है पर इन सबको माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत का लाभ दिया। जीवन ठाकुर ने फर्जी वन पट्टा बनाया भी था तो क्या यह अपराध 19 स्कूल का फर्जी पदाधिकारी बनने से भी बड़ा है। जिसमें उन्हें जेल जाना पड़ा। फर्जी जाति सर्टिफिकेट और फर्जी जाति सर्टिफिकेट पर नौकरी के दर्जनों मामलों मैं आज तक छत्तीसगढ़ में गिरफ्तारियां नहीं हुई कुछ कर्मचारी अधिकारी तो पूरी नौकरी करके सेवानिवृत्त हो गए। ऐसे में सर झुका कर यह मानना ही पड़ेगा की न्याय सबके लिए एक समान नहीं होता किसी के लिए नितिन तो किसी के लिए जीवन...।