24hnbc सत्ता किसी की भी हो अपमान का दंश ब्राह्मण विधायक के हिस्से ही क्यों.....
Thursday, 04 Dec 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 5 दिसंबर 2025।
कल ही बेलतरा विधानसभा क्षेत्र जिला बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेई (ब्राह्मण) विश्वविद्यालय का दिशांत समारोह था। कुलपति एडीएन बाजपेई (ब्राह्मण) के मुखाग्रेविंद से तमाम मेहमानों का नाम निकला पर चक अपने ही क्षेत्रीय विधायक जहां विश्वविद्यालय स्थित है का नाम कुलपति महोदय भूल गए, यह संयोग मात्र नहीं है। विधायक महोदय को विराजने के लिए उचित स्थान भी नहीं मिला हालांकि उनकी कुर्सी आरक्षित थी। विधायक सुशांत शुक्ला पहली बार विधायक बने हैं छात्र राजनीति में भी युवा तुर्क के नाम से पहचान रखते थे और विपक्षी पार्टी के नेताओं पर तीखे व्यंग्य करने के लिए अपनी पहचान रखते हैं।
भाजपा के शासन के 2 साल बीत रहे हैं पहली बार विधायक बने और मंत्री बन गए ऐसे उदाहरण भी छत्तीसगढ़ में मौजूद हैं पर यह खुशनसीबी बिलासपुर के ब्राह्मण विधायक को के हिस्से कभी नहीं आई। कांग्रेस के सरकार में भी शैलेश पांडे बिलासपुर विधायक ने बिलासपुर के कद्दावर नेता अमर अग्रवाल को चुनाव में पराजित किया था। पर मंत्री नहीं बन पाए थे इतना ही नहीं उन्हें के पार्टी के नेता छोटभैईये कार्यकर्ता उन्हें 5 साल तक समय-समय पर अपमानजनक परिस्थितियों में डालते रहे। तभी हमारा कहना है कि किसी अन्य वर्ग के विधायक के साथ बार-बार ऐसी परिस्थितियां पैदा कराईए और फिर उसे वर्ग की नाराजगी देखीये कितनी उम्र होती है। उदाहरण के लिए कांग्रेस शासन में तखतपुर विधायक ने एक वर्ग विशेष से खटपट माल ले ली थी परिणाम उसे वर्ग ने पूरे राज्य में कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन चला डाला था। स्पष्ट चेतावनी की गई थी यदि विधायक का टिकट नहीं काटा तो कांग्रेस सत्ता से बाहर होगी और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई है। इसी वर्ग के युवाओं ने राजधानी में सच्ची मुच्ची वाला नग्न प्रदर्शन भी कर दिया था।
अब मूल बात की ब्राह्मण विधायक ही उपेक्षा का शिकार क्यों होता है और मामला उसके आगे क्यों नहीं बढ़ता बेलतरा विधायक का कुछ दिन पूर्व ही अपने ही राजनीतिक दल के ब्राह्मण महिला नेत्री से विवाद हो गया था और मामला रैली में मंत्री के बाजू चलने को लेकर था स्पष्ट है ब्राह्मण आपस में ही एका नहीं रखते। बैठने नहीं चलने के स्थान को लेकर भी झगड़ लेते हैं मतलब गुस्सा नाक पर है तो फिर भुगतो.... वहां पांडे थी यहां बाजपेई थे और फिर आप ही ने कहावत बनाई है केके जैसा करेला नीम चढ़ा।