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24hnbc कोई मरे या जिए रेलवे को ढुलाई के अलावा सब दिखते हैं गाजर मूली
Tuesday, 04 Nov 2025 00:00 am
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बिलासपुर, 4 नवंबर 2025। 
देश में सबसे अच्छा वेतन और सुविधा पाने वाले रेलवे की ऐसी लापरवाही अब आम होती जा रही है। आज बिलासपुर के जिस स्थान लाल खदान में खड़ी गाड़ी को मेमू ने ठोका उसे स्थान की दूरी रेलवे जोन बिल्डिंग से महज 7 किलोमीटर के भीतर है। खाने का आश्रय यह दुर्घटना जीएम के नाक के नीचे या कनपटी के पीछे हुई कहीं जा सकती है। 
बिलासपुर से कोरबा जाने वाली मेमू स्टेशन से 4:08 पर छुट्टी और महज 7 किलोमीटर आगे खड़ी मालगाड़ी पर चढ़ गई। मृतकों की संख्या रेलवे प्रशासन अपनी मर्जी से तय करता है। करण मेमू में कोई आरक्षित श्रेणी नहीं होती और बगैर टिकट चढ़ने वालों की भी खासी संख्या होती है। कितने मारे रेलवे को बताना या छिपाना आसान है। अभी कुछ ही माह पहले रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी पत्रकारों को बुलाकर रेलवे सुरक्षा के लिए आवंटित बजट के कसीदे कढ़ रहे थे। आज वास्तविकता एक बार फिर से बाहर आ गई इस दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण ट्रेनिंग में कमी है। मालभाड़ा, माल ढुलाई रेलवे की प्राथमिकता है। बेतहाशा ट्रैक बढ़ाये जा रहे हैं और उन्हें संभालने के लिए लगी मानव श्रम को इस स्तर की ट्रेनिंग नहीं दी जा रही जिस तरह की मिलनी चाहिए। अन्यथा ऐसा कौन सा कारण है कि स्टेशन के इतने नजदीक मालगाड़ी मेमू के ड्राइवर को दिखाई नहीं, स्टेशन मास्टर, सिग्नल इंस्पेक्टर सब की जिम्मेदारी बनती है और पहली जिम्मेदारी बनती है जोन के जीएम और बिलासपुर के डीआरएम की, सरकार को क्या है जनता के टिकट के पैसे से काटी गई सुरक्षा राशि से मुआवजा दे देंगे। राज्य सरकार कुछ पैसा अपने खजाने से दे देंगे और वाह वही लूट लेंगे। फिर एक-दो दिन के भीतर ही बड़ा धार्मिक जलसा होगा धर्म की अफीम चाटी जनता धर्म की आस्था में सब भूल जाएगी जिस देश में कोविड से मरे नागरिकों का आंकड़ा छुपाया जा सकता है कहा जा सकता है ऑक्सीजन की कमी से कोई नहीं मारा, उसे देश में मेमू में सवार 20-22 रूपये की टिकट लेने वाले की हैसियत ही क्या है।