मस्तूरी में यूं ही नहीं चली 10 राउंड गोली ठाकुरों के वर्चस्व को अब मिली है सीधी चुनौती
Tuesday, 28 Oct 2025 18:00 pm
24 HNBC News
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बिलासपुर, 29 अक्टूबर 2025।
28 तारीख की शाम मस्तूरी में एक बार फिर से गोलियों की धमक से ठाकुरों के वर्चस्व को चुनौती दी गई। 20 तारीख के दिवाली के पटाखे अभी समाप्त ही नहीं हुए थे की संध्याकाल में जो पटाखे 28 को फूटे उन्होंने बता दिया कि देवता उठने के पहले किसी को समझाइश दी जा रही है कि उसका समय अब अंत की ओर है। यह बात इसलिए कह रहे हैं कि जो लोग हथियार बंद होकर गोली चलने आए थे वह पेशेवर तरीके से हथियार की ऊंचाई को एक स्तर से नीचे रखे थे अन्यथा 12-13 राउंड गोली चल और एक भी देह नीचे न गिरे सीधी बात है जो पक्ष गोली चल रहा है या चलवा रहा है वो चेतावनी दे रहा है और चुनौती दे रहा है ठाकुरों के आतंक को....
मस्तूरी का इतिहास उठाकर देखें करारी क्षेत्र के नागरिक विजय सुमन के पिता कालेश्वर सुमन जो जनप्रतिनिधि थे की हत्या किसने कराई। छत्तीसगढ़ राज्य बनते ही बीच चौराहे में एससी वर्ग के नागरिकों की जिन्होंने हत्या की वह सब सवर्ण वर्ग के थे और उस समय इस हत्याकांड से छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल आ गया था। इनका आतंक पुलिस कर्मचारियों पर भी टूटा एक हत्या हुई। पूरे मजदूरी क्षेत्र में जुआ और जुआ की फड़ पर ब्याज का इतिहास इन्हीं का है। तभी तो करोड़ों की जमीन जुए के फड़ पर कौड़ी की हो जाती है। जिस भी जुआरी का जमीन उनके फड़ में फंसती है। वह बाजार में किसी और के द्वारा सही दाम पर खरीदी नहीं जाती यही कारण है कि मस्तूरी क्षेत्र की जमीनों पर सीधी या पीछे से ठाकुरों की छाया है। क्षेत्र का सबसे बड़ा भूमि घोटाला जो भदौरा कांड के नाम से प्रसिद्ध है के पीछे भी कुछ ठाकुर ही मास्टरमाइंड से। कोढ़ से खाज जांच अधिकारी बामन आ गया और ठाकुरों को राहत मिल गई। इनकी पहुंच कहां तक है का उदाहरण है भदौरा कांड का कोर्ट केश उसे समय जी अदालत में यह प्रकरण पहुंचा जज आरक्षित वर्ग का था और उन्होंने सबको सजा सुनाई साथ ही पुलिस को और अधिक जांच का आदेश दिया। परिणाम जज साहब के पीछे पूरा सिस्टम इस तरह लग गया कि जज साहब की नौकरी ही चलते बनी।
क्षेत्र में जुए का आतंक इस कद्र है की खुली जमीन पर टेंट लगाकर जुआ होता है और यह सब कुछ महीनो से नहीं सालों से चल रहा है। जुआ खिलाने वाले चेहरे बदल सकते हैं पर संरक्षण इन्हीं का होता है। मस्तूरी विधानसभा आरक्षित वर्ग की है पर चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी इनकी देहरी से चरण स्पर्श करके ही निकलता है। पूरे ब्लॉक का आरक्षित समाज धीरे-धीरे इस वर्चस्व को अब सहन नहीं करता और अब यह लड़ाई सीधी आमने-सामने की है। वर्चस्व की यह लड़ाई इन स्तर तक पहुंचती भी नहीं यदि खाकी ने अपनी भूमिका सही निभाई होती। जाति वर्ग देखकर कार्यवाही करना उगाही के लिए किसी भी हद तक जाना और फरार आरोपियों से मधुर संबंध रखना तभी तो पटरी पर 1 साल पूर्व जो हत्या हुई थी उसके दो आरोपी 27 अक्टूबर को पकड़े गए और दोनों आरोपी इसी क्षेत्र में खुले आम जुआ खिलाते थे।