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बस्तर से लेकर राजधानी, न्यायधानी, ऊर्जाधानी, जन-सरोकार की पत्रकारिता हुई कठिन भाजपा के राज में पत्रकारों की जान जोखिम में
Monday, 13 Oct 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 14 अक्टूबर 2025।
छत्तीसगढ़ राज्य में जन सरोकार की पत्रकारिता कठिन होती जा रही है। बस्तर हो या न्यायधानी बिलासपुर या राजधानी का एम्स कहीं भी कभी भी जब भी कोई पत्रकार अपने काम को ईमानदारी से करता है तो उसकी जान आफत में आ जाती है। बस्तर में चंद्राकर की हत्या हो गई। बिलासपुर में कल तिफरा क्षेत्र में एक गैर कानूनी कार्य का कवरेज करने के कारण पत्रकार जियाउल खान पर जानलेवा हमला हो गया। रायपुर के एम्स में बाउंसर तैनात इसलिए है कि कोई पत्रकार फोटो ना खींच पाए इसके पहले रायपुर में ही जिला अस्पताल में बाउंसर तैनात किए गए थे और उन्होंने पत्रकारों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था। यही हाल एम्स का भी है अर्थात जंगल से लेकर राजधानी, न्यायधानी तक पत्रकारों की जान संकट में है। रायगढ़ में भी अडानी के गुंडे ने तो पत्रकारों को कलेक्ट्रेट परिसर में ही धमकाया गया था। कुल मिलाकर कानून साए-साए कर रहा है। भले ही मुख्यमंत्री अपनी समीक्षा बैठक में जिले के कलेक्टर और कप्तानों को निर्देश कुछ भी दें।