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24hnbc छूट-छूट ठगी -ठगी लूट -लूट दवाई दुकान का सच
Wednesday, 10 Sep 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 11 सितंबर 2025। 
छूट-छूट ठगी -ठगी दवा मार्केट वर्तमान और भूत दवाई एक ऐसा वस्तु है जो उपभोक्ता शौक से नहीं खरीदता। 10 वर्ष पूर्व बाजार में दवा दुकानों पर छूट के बंपर छूट के बोर्ड दिखाई देना शुरू हुए। इस सिलसिले से समझते हैं चेन सिस्टम के तहत पहले अपोलो फार्मेसी जैसे दुकानें खुली जिसमें उपभोक्ता का एक कार्ड बनता है। दवा खरीदते समय मोबाइल नंबर बताना जरूरी है छूट के राशि कार्ड में जमा हो जाती है। जमा राशि का उपयोग जब करते हैं तो पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी आता है कार्ड की कई श्रेणी है। कुछ पर सामान्य 5 से 7% छूट है कुछ पर 15% छूट है। यहां पर एक बात जानना आवश्यक है कि अपोलो के पास हजारों कस्टमर के अकाउंट में जमा धन राशि पड़ी है जिस पर उपभोक्ता को कोई ब्याज नहीं मिलता ये ठगी का एक प्रकार है। जिस पर आज तक किसी भी जागरूक उपभोक्ता ने ध्यान नहीं दिया मतलब दुकान पर सब बीमार जाते हैं। दूसरी छूट उन दुकानों पर प्राप्त हो रही है जो दवाई के बिल पर 10% से 50% तक छूट की बात करते हैं। सवाल उठता है कि दवाओं में इतनी कमाई है। घाटा खाकर तो कोई धंधा नहीं करता 10% छूट दे दी तो पारदर्शिता के साथ यह भी बता दें कि कमाया कितना। तीसरी दवाई की वह दुकान हैं जो डॉक्टर के नर्सिंग होम्स, अस्पताल, क्लीनिक के अंदर खुली है। ये दुकानदार एक प्रतिशत की भी छूट नहीं देते उलटे यदि आप डिजिटल पेमेंट करते हैं तो आपके डिजिटल पेमेंट का फोटो खींचते हैं। पूछने पर बताते हैं कि डॉक्टर साहब को हिसाब देना पड़ता है यदि इन्हीं दवाइयों को बाहर से खरीदे तो 10% से 40% तक की छूट प्राप्त हुई तो वह छूट की राशि नर्सिंग होम के अंदर किसके खाते में गई। क्या डॉक्टर का पेट उसे परामर्श शुल्क के रूप में मिली राशि से नहीं भरता जो की किसी भी डॉक्टर के पास 500 से कम पर नहीं है। कुछ डॉक्टर का परामर्श शुल्क तो ₹1000 है। 
अधिकतर दवाई दुकान वंशानुगत है पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही है कल्पना करें आज जो युवा दुकान में बैठा है उसकी पिछली दो पीढ़ी ने हमारी पिछली दो पीढ़ी को कितना ठगा। दबावों पर छूट का धंधा बताता है कि इस धंधे में पारदर्शिता का बेहद अभाव है इतना ही नहीं एक-एक दवाई की दुकानों में 24 घंटे चलने वाला एसी और बड़ी संख्या में कर्मचारी रखे गए किसी भी कर्मचारी का वेतन 10000 मासिक से काम नहीं कल्पनातिथ कमाई तभी तो पिछले 4 साल में बाजार में दवा दुकान बड़ी संख्या में खुली और किसी भी दुकान का शटर नहीं गिरा। 
 
 
 
 
 
 
 
(समाचार संकलन डाॅली पटेल)