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कोर्ट को लेना ही होगा सख्त निर्णय डीजे पर प्रशासन का ढुलमुल रवैया
Sunday, 07 Sep 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 8 सितंबर 2025। 
डिस्को जॉकी असल में यह वह विधा है जो इंदौर कैंपस में डांस और बार में चलती है। एक कलाकार वाद्य यंत्रों के पीछे इसे नियंत्रित करता है पर वर्तमान चर्चा में सड़क पर अति उच्च ध्वनि विस्तारक यंत्रों को डीजे कहा जा रहा है। हमेशा की तरह इस बार भी पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के निर्णयों के बाद भी अपने अधीनस्थों को मौखिक आदेश दे रखा है कि जिस वहां पर डीजे रखा है उसे वहां का नंबर नोट कर लो, डीजे संचालक का नाम पता नोट कर लो, और फोटो खींचकर रख लो तत्काल कार्यवाही मत करना ऐसा लगता है कि जब डीजे पूरी तरीके से सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त करके वातावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचाकर निकाल लेंगे तब प्रशासन कार्रवाई करेगा। क्या यह प्रश्न उठता है कि कोर्ट के निर्देश क्या इसी तरह के हैं अपराध होने के पूर्व उसे रोकना पुलिस व प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। उच्च न्यायालय में सरकारी वकील भी इसी फेर में रहते हैं कि जवाब लेने देने में त्यौहार का समय निकल जाए। छत्तीसगढ़ राज्य की वर्तमान सरकार चाहे तो ध्वनि प्रदूषण पर अटल बिहारी सरकार के समय बने कानून ही लागू कर दे पर नहीं करेगी बिल्ली के गले में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की सरकार घंटी नहीं बंधेगी। ऐसे में आम जनता को कोर्ट से उम्मीद है कि वे ऐसे ध्वनि विस्तारक उपकरण के उत्पादन को ही बन कर दें। जिसकी आवाज 20 फीट से आगे सुनाई ना दे। डीजे के चक्कर में मौत की कई खबर छत्तीसगढ़ से है और इन्हें अनदेखा किया जा रहा है। 
 
 
 
 
(समाचार संकलन डाॅली पटेल)