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24hnbc पांच कारण, नहीं चलेगा प्रधानमंत्री का विक्टिम कार्ड
Tuesday, 02 Sep 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 3 अगस्त 2025। 
 
भारत में विशेष कर हिंदी भाषी क्षेत्रों में लैंगिक गाली देना बोलचाल की भाषा में आता है। ऐसा कहा जाता है जिसके पास शब्द कम हो जाते हैं तो वह अपशब्दों की तरफ जाता है। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार में तो गली तकिया कलाम के रूप में उपयोग होती है। तब इस बात पर विचार जरूरी है कि बिहार में दरभंगा की सभा से निकली एक गाली क्या चुनावी मुद्दा बन सकती है। राहुल गांधी, तेजस्वी की वोट अधिकार यात्रा का विरोध कैसे करें। 13 दिन तक तो भारतीय जनता पार्टी को समझ ही नहीं आया और 14वें दिन एक अंजान द्वारा देश के प्रधानमंत्री की मां जी के लिए कह गए अपशब्द को प्रधानमंत्री ने ही मुद्दा बनाने की कोशिश की, राजनीति की जमीन पर नोटबंदी के दौरान ऑटो में बिठाकर जब माताजी एटीएम से₹2000 निकालने आई तो क्या उन्हें कांग्रेस और आरजेडी लेकर आए हमें याद नहीं आता की गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान बतौर मुख्यमंत्री वे अपनी मां से मिलने कितनी बार आए और जब गए तो क्षेत्रीय प्रचार माध्यमों में मुख्यमंत्री बेटे का मां मिलन कितनी देर दिखाया गया। पर प्रधानमंत्री बनने के बाद यह राजनीतिक दोहन मां का खूब हुआ कभी गोद में सिर रखकर फोटो खिंचवाई गई मां के हाथों से कुछ जेब खर्च लेते हुए फोटो दिखाई गई यहां तक की मां तो छोड़ो देश के चीफ जस्टिस के घर में जाकर गणेश आरती की गई तो भी दिखाई गई अर्थात मां का राजनीतिक दोहन तो किया ही साथ ही गणेश प्रथम आराध्या का भी राजनीतिक दोहन किया गया। 
भाजपा का तो इतिहास ही यही है गणेश जी ने दूध पिया कोई कैसे भूल सकता है। प्रधानमंत्री और भाजपा लाख प्रयास करें पंच कर्म से इस बार माताजी कार्ड नहीं चलेगा। पहले जिसे भावनात्मक ब्लैकमेल करना है उसे पता नहीं लगना चाहिए पर इस बार ऐसा नहीं है। बिहार का मतदाता राजनीति को लेकर जागरूक है उसे याद है प्रधानमंत्री अन्य की मां बहनों की कितनी इज्जत करते हैं। टैगोर टाइप दाढ़ी रखकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को किस तरह लक्षित किया। कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रेणुका चौधरी पर उनके द्वारा की गई टिप्पणी को कौन भूलेगा, कांग्रेस की विधवा, जर्सी गाय, हाइब्रिड बछड़ा कहते समय क्या जीव्हा पर किसी आसुरी ताकत का नियंत्रण हो गया था उसे समय शरीर में सिंदूर नहीं बहता था। दूसरा मामला सभी टिकता है जब अपनी छवि निर्विवादित हो पर प्रधानमंत्री के रूप में ऐसा नहीं है। अब उनकी छवि घोर विवादित है। भाजपा के प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने टीवी डिबेट में सुरेंद्र राजपाल की मां को ऑन और गाली दी, हिमाचल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राहुल गांधी की मां को मंच से गाली दी ऐसे में मेरा पर चरण बाकी का पैर खुर। बिहार में दी गई एक गली को लपक कर भाजपा और उसके सहयोगी चुनाव के मूल मुद्दे से हटाने का प्रयास कर रहे है।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महिलाओं के सम्मान को लेकर कितने संजीदा हैं विधानसभा की रिकॉर्डिंग उठा कर सुनी जा सकती है। रेसलर के शारीरिक मानसिक शोषण का मामला कोई कैसे भूल सकता है। किसानों के आंदोलन के दौरान उसमें शामिल महिलाओं को कितनी मजदूरी मिलती है का बयान कंगना ने ही तो दिया था कौन भूल सकता है। दिल्ली का सांसद मनोज तिवारी ने श्रीमती सोनिया गांधी के बारे में जिस तरह की टिप्पणी की थी कौन भूल सकता है। 
भाजपा की स्थिति अब क्रिकेट टीम के समान हो गई है जिसके दो प्लेयर पिच पर बैटिंग कर रहे हैं एक भी आउट हुआ तो टीम बाहर हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने 10 साल में भाजपा को मजबूत नहीं किया और दूसरा काम आरएसएस को कमजोर करने का किया। लिहाजा अब परेशानी शुरू हो चुकी है और इनका विश्वास लोकतांत्रिक देशों से हटकर रुस, चीन जैसे तानाशाही वाले देशों के साथ है। ऐसे में जितने दिन चल जाए बहुत है।