24hnbc सलवाजुडूम और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरा सच क्यों नहीं बताते गृहमंत्री
Saturday, 23 Aug 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 24 अगस्त 2025।
उपराष्ट्रपति के चुनाव प्रचार में जो गंभीरता होना चाहिए वह नहीं है। और प्रचार को स्तरहीन बनाने का काम देश के गृहमंत्री ने शुरू किया। गृह मंत्री ने जो मुद्दा उठाया है इसका सीधा संबंध छत्तीसगढ़ से है पर छत्तीसगढ़ में ही इस पर चुप्पी आश्चर्यजनक नहीं यह बताती है कि एक समय जो मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति, सामाजिक आर्थिक संदर्भों को प्रभावित कर रहा था छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी सरकार जिसका नेतृत्व डॉ रमन सिंह करते थे और अंतरराष्ट्रीय आलोचना का शिकार हो रहे थे आज छत्तीसगढ़ का मीडिया उस विषय पर चुप्पी रखता है।
गृह मंत्री ने कहा कि बी सुदर्शन रेड्डी ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट जज रहते हुए एक ऐसा फैसला दिया जिसके कारण नक्सलवाद से निपटने में देरी हो गई। पूरी आलोचना को समझाना और सच्चाई बताना बेहद जरूरी है। पहली बात उच्चतम न्यायालय के जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी का यह फैसला जो राज्य सरकार के नीति "सालवाजुडूम" को असंवैधानिक बताया था वह दो जज की पीठ में सर्वसम्मति से दिया है। दूसरे जज का नाम से निझर था। 2005 में भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए एक नीति बनाई जिसके तहत आदिवासी युवाओं को हथियार दिए गए उन्हें एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) का पद दिया और नक्सलियों के खिलाफ उतार दिया। राज्य पुलिस पीछे और एसपीओ आगे इस सलवाजुडूम नाम दिया गया। पूरे छत्तीसगढ़ में जंगल से लेकर शहर तक इसकी रेलिया होती थी इस पर खर्च हो रही राशि का कोई हिसाब किताब नहीं था और उसे समय के कांग्रेसी नेता नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा मुख्यमंत्री की गोद में बैठे हुए थे। 2008 में सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी कुमार और रामचंद्र गुहा ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में शरण ली 2008 में शुरू हुई यह याचिका 2011 में आदेश आया दोनों न्यायाधीशों ने कहा राज्य सरकार संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार और 21 व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन कर रही है। अपने ही नागरिकों के खिलाफ अपने ही नागरिकों को हथियार देकर इस तरह नहीं लडाया जा सकता। कानून व्यवस्था नागरिकों के सुरक्षा का दायित्व राज्य सरकार का है और वह इसे निभाने में नाकाम है।
आदिवासी नागरिकों को दिए गए हथियार तुरंत वापस लिए जाए और ऐसा हुआ भी राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं की यदि उसे समय के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह सलवाजुडूम की नीति को उचित मानते थे और भी सुदर्शन रेड्डी की बेंच उसने राज्य सरकार के फैसला सलवाजुडूम को असंवैधानिक कहा था के खिलाफ अपील करनी थी और इससे बड़ी पीठ गठन का निवेदन करना था। उन्होंने ऐसा नहीं किया सलवाजुडूम के वक्त हुई जाजतियो पर चुप हो गए। उसे समय छत्तीसगढ़ पुलिस के एक आईपीएस अधिकारी कल्लूरी का इतना आतंक हुआ करता था कि उच्च न्यायालय के आदेश पर जांच के लिए आई हुई सीबीआई टीम भी जांच नहीं कर पाती थी। पर 2025 में केंद्रीय गृहमंत्री केवल सुदर्शन रेड्डी को टारगेट कर रहे हैं और छत्तीसगढ़ का मीडिया पूरे संदर्भ को नहीं बताना चाहता तो क्या छत्तीसगढ़ के कांग्रेसी नेता भी चुप रहेंगे उन्हें तो सलवाजुडूम की सच्चाई बतानी चाहिए।