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24hnbc लोकतंत्र को "लोक" ही बचाएगा
Wednesday, 13 Aug 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 14 अगस्त 2025। 
बगीचे को वही व्यक्ति समझ सकता है जिसका दामन कभी कांटों से उलझा हो। आज जब हमारा लोकतंत्र 2025 में खड़ा है तो वो पीढ़ी विदा हो चुकी है जिसने ब्रिटिश दास्तां से मुक्ति के लिए आंदोलन किए थे। संविधान की रक्षा कोई इवेंट मैनेजमेंट नहीं की नेता लाल किले की डमी तैयारी करके उसके सामने मन की बात करें। 15 अगस्त दिन शुक्रवार साल 1947, 26 जनवरी साल 1950 दिन गुरुवार आज के युवा जानते ही नहीं की संविधान सभा के लिए 25 जुलाई 1946 में ही प्रक्रिया शुरू हो गई थी और पहली बैठक दिसंबर 1946 में हुई। इसी बीच भारत का विभाजन हुआ तो संविधान सभा भी दो भागों में बट गई और भारत की संविधान सभा में 299 सदस्य थे और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद इसके अध्यक्ष थे। 
2 साल 11 महीना 18 दिन का गर्भकाल रहा है। इस संविधान का जो आज खतरे में है 26 नवंबर 1949 को पारित हुआ 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ। 11 दिसंबर 1950 को रामलीला मैदान में आरएसएस ने संविधान के प्रतियां जलाईं कारण हिंदू महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार और तलाक का अधिकार मिला है। स्पष्ट है कि निर्माण प्रक्रिया से ही वे ताकते सक्रिय हो गई थी जो भारत को लोकतांत्रिक समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं बनने देना चाहती थी। निर्वाचन की पूरी व्यवस्था संविधान के भाग 15 अनुच्छेद 324 से 329 ए के बीच है। एक मत और सब का एक समान मताधिकार का हाल हमें यूं ही नहीं मिल गया इस पर भी दक्षिणपंथी ताकतों को बेहद एतराज था वे तो गरीबों को, अशिक्षित को मताधिकार देना ही नहीं चाहते थे और आज भी वे ताकते मताधिकार के पीछे पड़ी है। 
मत देने की आयु 21 से 18 करने का श्रेय राजीव गांधी को है और उन्हें का पुत्र आज मताधिकार के लिए लड़ रहा है। 15 अगस्त 1925 को जब फिर से प्रॉउटर को देखकर जुमलेबाजी होगी तो हमें अपने ज्ञान चक्षु खुला रखना है और संघर्ष के लिए तैयार रहना है। चुनाव की पारदर्शिता केचुआ नहीं बचाएगा लोकतंत्र है और उसकी रक्षा की अंतिम जिम्मेदारी "लोक" की है।