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24hnbc डायोसिस के बाद अब शतरंज के बोर्ड पर आईसीसीडीसी
Tuesday, 08 Jul 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 9 जुलाई 2025। 
प्रदेश की मसीही संस्थाएं और उसके पदाधिकारी षड्यंत्रकारी है या षड्यंत्र के शिकार इस प्रश्न का उत्तर खोजना जटिलता भरा है। बरसों पहले आईसीसीडीसी और उसके पैतृक संस्था ने अपनी दो नजूल संपत्ति उसे समय के राय साहेब की उपाधि प्राप्त बनवारी लाल को बेची कभी से मंदिर चौक स्थित संपत्ति, विवाद का विषय बनी कोर्ट दर कोर्ट, फैसले दर फैसले के बाद भी अभी तक इसके पक्षकार एक दूसरे पर षड्यंत्र का आरोप लगाते हैं। 
आईसीसीडीसी स्वयं को 1962 में पंजीकृत बताती है सिविल लाईन थाने के बाजू का डिसाईपल्स चर्च के पीछे इनका कार्यालय है। कार्यालय के बाहर बोर्ड लगा है न्यायालीन आदेशों को पढ़ने समय यह पता चलता है कि इस संस्था के सचिव एक समय अधिवक्ता एल.एन. सोनी हुआ करते थे। जो अब पृथ्वी नमक ग्रह पर जीवित नहीं है। वर्तमान सचिव बहुत सारे संस्थानों पर शिकायत पत्रों में संस्था के लिए हुई अनियमितताओं का दोषारोपण इन्हीं पर करके आगे बढ़ते हैं। पंजीयन संबंधी दस्तावेज और उसमें संलग्न नियमावली से स्पष्ट होता है कि संस्था का मुख्य पदाधिकारी 62 वर्ष की आयु पूरी करते ही सेवानिवृत हो जाएगा। इस नियम का ईमानदारी के साथ पालन यहां होता दिखाई नहीं देता। 
उच्च न्यायालय ने भी एक से अधिक बार तत्कालीन सचिव के आवेदन को इसी आधार पर खारिज़ किया है, और वर्तमान पदाधिकारी भी आयु सीमा के चक्कर में आ चुके हैं। कहा जाता है कि आयु संबंधी सीमा में संशोधन हुआ है पर उसके दस्तावेजी प्रमाण पढ़ने में नहीं आए। चर्च के पीछे स्थित ऑफिस में नवीन निर्माण होता रहा पर ना तो नजूल/नगर पालिका निगम से एनओसी प्राप्त की गई। मसीही समाज के ऐसे पदाधिकारी जो अपने नाम के आगे रेवरेंट की उपाधि लिखते हैं उन्हें कुछ विशेषाधिकार यूं ही मिल जाता है, और वे इसका उपयोग करने से संकोच भी नहीं करते। इस समय बिलासपुर के एक थाने में आईसीसीडीसी के पदाधिकारी और सरकंडा क्षेत्र के एक सेठ की शिकायत चर्चा का विषय है। दो पेज की इस शिकायत की 10000 करोड़ का मामला छुपा हुआ है। दोनों आवेदक स्वयं को पीड़ित बताते हैं और विभिन्न न्यायालयों के आदेश और समझौते का उल्लेख करते हैं पर आवेदन के साथ दस्तावेज नहीं लगते संस्थाओं की आय व्यय में भी ऐसी एंट्री ही नहीं है जिनका उल्लेख न्यायालय के वाद पत्रों में भी किया गया है। जमीन संबंधी यह कथानक मकड़ी के जल के समान रचा बसा है। जिसे साधारण समझ वाला पकड़ ही नहीं सकता.....