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24hnbc मॉक पार्लियामेंट रखेंगे, असल संसद से बचेंगे...
Thursday, 12 Jun 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 13 जून 2025। 
               मॉक पार्लियामेंट का करेंगे आयोजन पर असल संसद से पीठ दिखाएंगे। भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि देश के युवाओं को इमरजेंसी का सच बताने के लिए 25 जून को हर जिले में मॉक पार्लियामेंट का आयोजन करेगी वह बताएंगे कि 25 जून 1975 में देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजनीति महत्वकांक्षा को पूरा करने संविधान की बलि देकर आपातकाल लगाने का महापाप किया था। पर इसी भारतीय जनता पार्टी के शासन में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2014 से किस तरह जांच एजेंसियों का राजनीतिकरण हो रहा है और उससे किस तरह संविधान को रौंदा जा रहा है। हर जिले में मार्कडील की तर्ज पर मॉक पार्लियामेंट होगी पर पूरा विपक्षी दल द्वारा हस्ताक्षर कर के संसद का विशेष सत्र बुलवाने की मांग ठुकरा दी जाएगी। 
1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संवैधानिक व्यवस्था के तहत आपातकाल की घोषणा की आम नागरिकों ने 77 में उन्हें चुनाव हरा भी दिया और मात्र ढाई साल के अंतराल में फिर गाड़ी पर बिठाल दिया। अर्थात जनता ने उनके आपातकाल के निर्णय के लिए उन्हें सजा भी दी और बाद में ताज भी दिया। इंदिरा गांधी ने जो क्रांतिकारी फैसले लिए राजाओं का प्रिवी पर्स खत्म किया, परमाणु परीक्षण किया, बांग्लादेश का निर्माण किया, बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया इस सब को भी तारीख और साल के अनुसार भाजपा को वैसे ही याद करना चहिए जैसे आपातकाल को करते हैं। 
जनता को मोदीजी के 11 साल याद है योजना आयोग का खात्मा, नोटबंदी, जीएसटी, लॉकडाउन, एनआरसी, सीएए सब कुछ याद है। कैसे 11 साल में आलोचकों को जेल पहुंचाया गया। बगैर ट्रायल 5 साल से खालिद बंद है। कैसे सुधा भारद्वाज जैसी अधिवक्ता को जेल में बंद रखा गया और तो और नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेघा पारकर को जेल भेजने का कोई मौका नहीं छोड़ा गया। जनता बदलकर कैसे चुनाव जीतने की साजिश होती है और कैसे केंद्रीय चुनाव आयोग केचुआ बनाया जाता है। हम देख रहे हैं। एक समय देश के चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा अंतर्राष्ट्रीय थी अब हम इसे केचुआ कहते हैं। लगता है पीएमओ का एक्सटेंशन काउंटर चुनाव आयोग है। और लाभार्थी कभी आयुक्त तो कभी भाजपा हो जाते हैं।
1 समय देश की विदेश नीति जो अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा पार्टी थी अब हास्य का विषय बनती है। सरकार देश के 64.3% नागरिकों को 5 किलो मुफ्त अनाज देकर यह गर्व करती है कि पहले केवल यह सुविधा 24.4 के पास थे 5 किलो का अनाज देश की 64% जनसंख्या को देना राष्ट्रीय गर्व नहीं शर्म की बात है। हाल ही में आईएलओ ने यूनिसेफ के साथ मिलकर बताया है कि 14 वर्ष के तकरीबन एक करोड़ बच्चे मजदूरी के लिए मजबूर हैं। क्या इसे भी राष्ट्रीय गौरव कहा जाएगा।