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लिखित तर्क जमा करने के लिए निर्देश मिशन अस्पताल उच्च न्यायालय में बहस हुई पूरी
Friday, 25 Apr 2025 00:00 am
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बिलासपुर, 25 अप्रैल 2025। 
हाई कोर्ट में चल रहे साधारण मामले के भी समाचार दैनिक समाचार पत्रों में आ जाते हैं परमिशन अस्पताल लीज होल्डर सीडब्ल्यूबीएम विरुद्ध शासन का प्रकरण समाचारों में स्थान नहीं पता। उच्च न्यायालय में लगातार दो दिन दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने लंबी बहस की जस्टिस ने बहस पूर्ण होने के बाद 29 अप्रैल तक लिखित तर्क जमा करने कहा। इसी के बाद निर्णय आएगा लगता है कि निर्णय मई माह ही ग्रीष्मकालीन अवकाश के पहले होगा। 
वर्ष 2024 में कलेक्टर बिलासपुर में सीडब्ल्यूबीएम की लीज , लीज की शर्तों का उलंघन करने को आधार बनाकर निरस्त कर दिया। कमिश्नर, सचिव के फोरम से होता हुआ अब यह मामला उच्च न्यायालय में है। महाधिवक्ता स्वयं इस मामले में शासन का पक्ष रखने खड़े हुए उन्होंने याचिकाकर्ता के लोकस को ही चुनौती दी याचिकाकर्ता के द्वारा प्रस्तुत की गई पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर भी प्रश्न उठाए और कहा कि सीडब्ल्यूबीएम का डायरेक्टर डॉ रमन जोगी था जिसने लीज का उलंघन किया और चलता बना और जो लोग सीडब्ल्यूबीएम के डायरेक्टर बनकर आ रहे हैं वे जोगी के पोपट हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बीपी शर्मा ने मध्य प्रदेश उच्च न्यालय के जस्टिस गुलाब गुप्ता का पूर्व निर्णय पेश किया है और यह निर्णय बताता है की जमीन सीडब्ल्यूबीएम के पास कैसे आई लीग के उलंघन का जवाब उन्होंने यह दिया कि लीज होल्डर संपत्ति को किराए पर दे सकता है। और यदि सीडब्ल्यूबीएम के डायरेक्टर ने कैंटीन से समोसा, आलूगडा बिकवा दिया तो कौन सा लीज का उलंघन हो गया। अस्पताल की आयु 100 वर्ष से अधिक रही और अमेरिका से आई हुई तीन नर्स ने इसे प्रारंभ किया था। संस्था ही जीवित रहती है व्यक्ति आता जाता है । और अस्पताल लगातार कार्यरत रहा उच्च न्यालय के अतिरिक्त सत्त्व के निर्धारण का एक प्रकरण सत्र न्यायालय में भी विचाराधीन है जहां सीडब्ल्यूबीएम नगर निगम बिलासपुर, कलेक्टर बिलासपुर पक्षकार हैं। तथा आवेदक डिसाईपल बिलासपुर है। इस प्रकरण में निषेधाज्ञा के पूर्व 7,11 वाद प्रचलन योग्य नहीं है पर निर्णय होना है। राज्य सरकार ने मामला न्यायालय में होने के बावजूद बजट में योजना के लिए वित्तीय आवंटन किया है और निगम ने भी अपने बजट में राशि निर्धारित की है जिससे ऐसा लगता है कि राज्य सरकार मिशन अस्पताल के न्यालीन प्रकरणों को पूर्व से ही जीता हुआ मान रही है।