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24hnbc सैकड़ो के लिए मिशन का टूटना दुख का क्षण था, पर बर्थडे भी जरूरी है
Friday, 10 Jan 2025 18:00 pm
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बिलासपुर, 11 जनवरी 2025।
हाल ही में ध्वस्त हुए मिशन अस्पताल की अध्यक्ष बिशप को अपने जन्मदिन को मनाने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है ,जबकि मसीही समुदाय ऐतिहासिक मिशन अस्पताल के ढहाने पर शोक मना रहा है ।
अस्पताल के नुकसान के लिए अपनी संवेदना व्यक्त करने और यह स्वीकार करने के बावजूद कि जश्न मनाने का समय आदर्श नहीं है, बिशप को उत्सव के साथ अपने जन्मदिन को खुशी से मनाते हुए देखा गया। इस निर्णय की समुदाय के सदस्यों ने आलोचना की है, जिन्हें लगता है कि उनके कार्यों में उनकी मंडली की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की कमी दिखाई देती है।
मसीही समुदाय के कई लोग बिशप की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें लगता है कि इस कठिन समय के दौरान पूरी तरह से सहानुभूति व्यक्त करने में उनकी विफलता उन मूल्यों से अलगाव को दर्शाती है, जिन्हें बनाए रखने के लिए उन्हें बिशप बनाया गया है। जबकि समुदाय अस्पताल के विध्वंस के परिणामों से जूझ रहा है, बिशप के जन्मदिन के जश्न ने चर्च के भीतर नेतृत्व और जवाबदेही के बारे में बातचीत को जन्म दे दिया है।
लगभग 1 साल पूर्व जब जबलपुर डायोसिस का बिशप सिंह को बड़ी आर्थिक गड़बड़ियों के चक्कर में जेल जाना पड़ा तमाम संस्थानों पर छापे पड़े और बड़ी मात्रा में ईसाई समाज की संस्थाओं के भीतर हो रही आर्थिक अनियमितताओं का भांडा फूटा तो आम जनता को पता चला कि इस साम्राज्य के भीतर लुटेरे कि आवरण में सक्रिय हैं। छत्तीसगढ़ की शैक्षणिक संस्थाओं के संदर्भ में बिलासपुर उच्च न्यायालय में ही एक जनहित याचिका लगी थी उसे जनहित याचिका में समाज के ही कुछ विसील ब्लोअर ने बड़े सवाल उठाए हुए सवाल अभी भी प्रासंगिक है। 
उच्च न्यायालय का 2013 का निर्णय और उसके परिपेक्ष में हाल ही में नागपुर उच्च न्यायालय में लगी एक याचिका जिस पर छत्तीसगढ़ डायोसिस के सचिव और रजिस्टर छत्तीसगढ़ शासन को नोटिस हुए हैं। साथ में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की पीआईएल जिस पर 2019 में विस्तृत आदेश आया था को सिलसिलेवार तरीके से पढ़ने के बाद यह पता चलता है कि साम्राज्य करोड़ का नहीं कई करोड़ का है। और यहां जी पदाधिकारी का गलीचा उठा लो फर्श के नीचे भ्रष्टाचार के कॉकरोच बिलबिला रहे हैं जो सफाई करना चाहता है उसे समाज से बहिष्कृत किया जाता है। जो पावर में है वे अपने पावर को बचाने के लिए बड़े से बड़े वकील की फीस अदा करने को तैयार है। 
न्यायालय मामलों में इस समय डायोसिस की बड़ी धनराशि खर्च हो रही है। जब इतना कुछ होगा तो उसके राजनीतिक मायने भी निकल जाएंगे। हमने पहले भी कहा था मिशन गिरेगा तो आज रायपुर से लेकर लुटियन दिल्ली तक लगेगी सो लगी है।