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24hnbc पूरक बयान के आधार पर का आरक्षक बने आरोपी
Monday, 07 Dec 2020 18:00 pm
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बिलासपुर। जिले की पुलिस पर दैहिक शोषण के मामलों पर गैर जिम्मेदारी के आरोप लगते हैं। विशेष कर पीड़िता के नाबालिक होने पर आती है, देखा जा रहा है कि पीड़िता के 164 का बयान और सीडब्ल्यूसी का बयान के बाद भी कुछ आरोपी का नाम बच जाता है। इस स्थिति में पुलिस पर लेन देन का आरोप लगता है सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञों की माने तो इसके पीछे का कारण ऐसा मामलों में पीड़ित पक्ष को काउंसलिंग ना मिल पाना भी है सरकंडा थाने का मामला कुछ ऐसा ही है नाबालिग पीड़िता ने जब पहली बार लिखित शिकायत की तब उसने डायल 112 के किसी भी आरक्षक के खिलाफ ना तो मौखिक कहा और ना ही लिखित जिस ऑटो चालक का नाम लिया वह गिरफ्तार हुआ पीड़िता का 164 का बयान भी यही था, फिर सीडब्ल्यूसी के समक्ष दिए गए बयान में भी कोई नया नाम नहीं जुड़े बाद में पीड़िता ने जांच के दौरान एक और बयान दिया जिसके आधार पर दो आरक्षकओं के नाम भी बतौर आरोपी शामिल हुए पूरे घटनाक्रम से यही लगता है कि नाबालिक और सामान्य दैहिक शोषण के प्रकरणों में मनोवैज्ञानिक परामर्श बेहद जरूरी हो गए हैं तभी विवेचना में सच्चाई सामने आ सकेगी।