
15 साल लगातार विपक्ष की भूमिका निभाने के बाद पिछले दो सालों से राज्य में कांग्रेस की सरकार स्थापित तो हुई है, किंतु अब तक निगम मंडल की नियुक्ति का इंतजार कार्यकर्ताओं को अभी है। हालांकि कोरोना काल के पहले निगम मंडल की सुगबुगाहट काफी तेज हुई थी। इस दौरान कई नाम चर्चा में आए थे तथा दावेदार अपने-अपने पक्ष में लाबिंग भी करने में कोई कसर बाकी नहीं रखे थे, किंतु कोरोना वैश्विक महामारी ने एक तरह से इनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब चुकी निगम मंडल में नियुक्ति की सुगबुगाहट एक बार फिर से जोर पकड़ रही है, जिसके चलते संभावित दावेदार इन दिनों राजधानी में डेरा डाले हुए हैं तथा अपने-अपने पक्ष में लाबिंग करने में कोई कसर बाकी नहीं रखे हैं।समय-समय पर प्रदेश प्रभारी के बयान से कुछ नेताओं की बेचैनी भी बढ़ गई हैं, जिनमें पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने तथा टिकट नहीं मिलने पर कुछ सशक्त दावेदारों को दिलाया गया भरोसा है, जिसमें कहा गया था कि यदि सरकार बनती है तो उन्हें ही अवसर दिया जाएगा। बहरहाल इन तमाम बनते बिगड़ते समीकरणों में अब कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं तथा कई चेहरे ऐसे हैं, जिन्हें निगम मंडल में जगह मिलने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिनमें मुख्य रुप से नवागढ़ विधानसभा से जावेद खान तथा मुख्यमंत्री के नजदीकी विजय बघेल, बेमेतरा विधानसभा से अविनाश तिवारी, डा.प्रवीण वर्मा तथा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष कविता साहू का नाम मुख्य रूप से लिया जा रहा है। इसी तरह साजा विधानसभा की अगर बात की जाए तो साजा विधानसभा में पद की चाह रखने वाले दर्जनों नेता है, किंतु अंतिम निर्णय साजा विधानसभा के विधायक तथा कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे को ही करना है, जिसके चलते वहां खुले रूप से कोई भी अपना नाम और दावेदारी करने से बच रहे हैं। इन नामों पर अंतिम मुहर किस नाम पर लग पाता है यह तो सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।