24 HNBC News
24hnbc आधा तोर - आधा मोर के तर्ज पर चल रहा प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना मे "भ्रष्टाचार"
Saturday, 20 Jul 2024 18:00 pm
24 HNBC News

24 HNBC News

24hnbc.com
जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार किस हद तक सिर चढ़कर बोल रहा है। यह अंदाजा लगा पाना किसी के बस की बात नहीं है, गांव में कैसे सरपंच सचिव तथा इंजिनियर मिल कर आम जनता व शासन की खजाने को चूना लगा रहे। आप इस ख़बर के माध्यम हैं देख सकते है, मामला जिले की बलौदाबाजार जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम छुइहा (माल गुजार) ग्राम पंचायत भरसेली का है इसका यही भ्रष्टाचार आम जनता के लिए मुसीबत बना हुआ है। इसके साथ साथ शासन के खजाने को भी जमकर चूना लगा रहा है और अपनी जेब भर रहा है। 
आखिर आरईएस उप अभियंताओ को क्यों दिया जा रहा है संरक्षण बड़ा सवाल
आखिरकार सवाल उठना इस लिए लाजमी हो जाता है क्यों
कि मामला आम जनता के हितों का है, लेकिन कुछ नेता है जो इन भ्रष्टाचारियों को पनाह दे रहे हैं, ऐसा क्यों? यह जनता सवाल पूछती है क्या आम जनता से इन्हें कोई मतलब नहीं रहा। यह बात समझ से परे है, जिस जनता ने बड़े-बड़े सपने पाल कर इन नेताओं को अपनी सुरक्षा एवं विकास के बागडोर के साथ सत्ता की कुर्सी इन्हें सौंपने में जी जान लगा दी, लेकिन ये वही नेता व नेताओं के चहेते हैं, जो वोट देने वाली जनता को इस तरह मरने के लिए छोड़ चुके है। इनके दलाल अब इस जनता के दुख दर्द को भूल कर अपनी जेब भरने तक ही सीमित रह गए है और इनके आका भी पैसे के लिए इन भ्रष्टाचारियों की ही मदद करते हैं। यही नहीं भ्रष्टाचार करने वाले लोग नेताओं के इर्द-गिर्द घूम कर जनता को अपना प्रभाव दिखाते है। उसके बाद उसी की धौंस दिखा कर उसी जनता को ठगने और परेशान करने में जरा भी संकोच नहीं कर रहे हैं, बल्कि अब भ्रष्टाचार की सभी सीमाओं को लांघ कर इनके द्वारा सीधे-सीधे जनता जनार्दन के हक पर डाका डाला जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो ऐसे दोहरे चरित्र के नेताओं व इनके दलालों को भी जनता चुनाव में सबक सिखा कर ही दम लेगी
 जानिए क्या है प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना
 भारत में केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2009-10 में शुरू किया गया एक ग्रामीण विकास कार्यक्रम है , जिसका उद्देश्य केंद्रीय और राज्य योजनाओं के अभिसरण और प्रति गांव के आधार पर वित्तीय निधि आवंटित करके अनुसूचित जातियों के लोगों के उच्च अनुपात (50% से अधिक) वाले गांवों के विकास के लिए है।इस योजना को महत्वाकांक्षी माना जाता है क्योंकि इसका उद्देश्य गांवों में कई विकास कार्यक्रम लाना है। इनमें से कुछ कार्यक्रम भारत निर्माण , ग्रामीण सड़कों, जलापूर्ति, आवास, विद्युतीकरण के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और सर्व शिक्षा अभियान , महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम , एकीकृत बाल विकास सेवा और स्वच्छता जैसी अन्य बड़ी योजनाएं हैं। यह कार्यक्रम लगभग 44,000 गांवों पर लागू होगा, जिनमें अनुसूचित जातियों की आबादी 50% से अधिक है और इसलिए वे पीएमएजीवाई के लिए योग्य हैं।
5लाख रुपये की लागत से किया नाली का निर्माण
तकरीबन 5 लाख रुपये की लागत से नाली का निर्माण कार्य सरपंच व सचिव इंजिनियर एसडीओ जो कागजों में बन कर तैयार हो चुकी है, लेकिन अगर नाली निर्माण की जमीनी हकीकत पर नजर दौड़ाये तो इस निर्माण कार्य की असलियत कुछ और ही बयां कर रही है, जिसमें साफ देखा जा रहा है कि भ्रष्टाचारियों ने जनता व शासन प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने में कोई कसर नहीं छोड़ा है।इसी नाली निर्माण के चलते ग्राम वासियों की जिंदगी नरक बन कर रह गई है। यही नहीं इस निर्माण के माध्यम से आम जनता के लिए मौत का रास्ता तैयार किया गया है। जहां आए दिन लोगों की जिंदगी तबाह हो रही है। इसकी वजह से आधा दर्जन से अधिक लोग व कई जानवर व अन्य मवेशी दुर्घटनाग्रस्त हो चुके है जो जिंदगी और मौत से जुझ रहे है और आए दिन दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
करीब 70 प्रतिशत कार्य करा कर निकाल लिया पूरा पैसा
नाली का निर्माण ईश्वर महिलांगे के घर से बनवाली बंजारे के घर तक किया जाना था , इस नाली निर्माण की लागत लगभग पांच लाख है, जिसे प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना मद के नाम पर निकाल लिया गया है। नाली निर्माण की लम्बाई स्टीमेट के मुताबिक होना है इंजिनियर द्वारा पूछे जाने पर स्टीमेट देकर बता पाउँगा कहा गया। आधा अधूरा बने होने के कारण पानी पास नहीं हो रहा है और नाली में ही भरा रहता है, जिसकी वजह से गंदगी और अनेक बीमारियां हो रही है और डेंगू जैसे खतरनाक मच्छर पनप रहे है।
स्थानीय लोगों ने लगाया आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि नाली का निर्माण कार्य जगह जगह तो छोड़ ही दिया गया है, साथ ही प्लास्टर व जमीन में कांक्रीट तथा कोपिंग का कार्य भी नहीं कराया गया है, यही नहीं कई जगह नाली को जोड़ा भी नही गया है, असल में नाली निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। जब कि अधिकारियों से सांठगांठ कर सरपंच सचिव पेमेंट ढाई लाख निकाल चुका है और निर्माण कार्य कागजों में पूर्ण होना दिखा दिया है, लेकिन निर्माण कार्य अभी भी महज 70% ही हो पाया है। अधूरे निर्माण कार्य की वजह से जगह-जगह सीपेज है और नाली का गंदा पानी लोगों के घरों व दुकानों में भी घुस रहा है, जिसकी वजह से घरों में सीलन भी हो रही है, जो अनेक बीमारियों को जन्म दे रही है और लोग इसकी वजह से परेशान है।
निर्माण कार्य में गुणवत्ता का नहीं रखा गया कोई ध्यान
लोगों ने यह भी आरोप लगाया है निर्माण के दौरान वहां रह रहे लोगों का रास्ता अवरुद्ध हो गया, तब लोगों ने अपने ही पैसे से घर के सामने आने जाने के लिए रास्ता तैयार किया जिसका पैसा स्वयं अपनी जेब से खर्च करना पड़ा, कई लोगों को तो सरपंच पति द्वारा यह भी आश्वासन दिया जा रहा है कि बचे 30से 40%नाली निर्माण कार्य बाद मे कराया जायेगा जबकि आरईएस इंजिनियर एसडीओ और जनपद पंचायत सीईओ द्वारा कार्य के पूर्णता पत्र भी जमा कर दिए है सवाल यह उठता है इंजिनियर द्वारा आधे अधूरे कार्य को पूर्ण कर दिए किन्तु एसडीओ द्वारा कैसे सत्यापन कर दिया गया उसके बाद जनपद पंचायत के सीईओ द्वारा पूर्णता पत्र मे हस्ताक्षर कर दिया गया इस प्रकार कार्य के रवैये से अनुमान लगाना कोई गलत नहीं होगा कि इस प्रकार आधे अधूरे कार्य को कागजो मे पूर्ण बताने मे बराबर भागीदारी दिख रही है जिसे झूटलाया नहीं जा सकता है काम के साथ राशि के बन्दर बाट बराबर हिस्सा होगा।यही नहीं इसके अलावा जो आधा अधूरा निर्माण कार्य कराया गया है उसमें भी गुणवत्ता का जरा भी ध्यान नहीं रखा गया। लोगों की माने तो मिट्टी डस्ट और देसी बालू से नाली का निर्माण कार्य कराया गया है जो सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन कर रह गया है।
बिडंबना है कि जिले भर में निर्माण कार्य को लेकर लगातार अनियमिताएं सामने आने के बाद भी सम्बंधित विभाग के अधिकारी सबक नही ले रहें है।जिसके कारण पंचायत क्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है।
जिले में नये कलेक्टर की पदस्थापना और लगातार हो रही कार्यवाही से भ्रष्टाचार लगातार सामने आने लगे हैं।ग्रामीणों को अब आस आने लगी है कि अनियमितता को उजागर करने पर उन पर जिला कलेक्टर जरूर कार्यवाही करेंगे।